छत्तीसगढ़

ऊर्जा बचत और पर्यावरण सुरक्षा : मुख्यमंत्री साय की नई पहल

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ऊर्जा संरक्षण के आह्वान को आगे बढ़ाते हुए संसाधनों के विवेकपूर्ण उपयोग पर ज़ोर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि पेट्रोल-डीजल जैसे सीमित संसाधनों की बचत करना न केवल आर्थिक जरूरत है, बल्कि यह राष्ट्र निर्माण और आने वाली पीढ़ियों के प्रति हमारा नैतिक कर्तव्य भी है।

मुख्यमंत्री ने इस दिशा में कुछ महत्वपूर्ण घोषणाएं और बदलाव किए हैं, जो इस प्रकार हैं:

  1. सरकारी स्तर पर मितव्ययिता की शुरुआत

मुख्यमंत्री ने स्वयं उदाहरण पेश करते हुए निर्णय लिया है कि उनके आधिकारिक दौरों के दौरान कारकेड (काफिले) में केवल अत्यंत आवश्यक वाहनों को ही शामिल किया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने मंत्रियों और निगम-मंडलों के पदाधिकारियों से भी सरकारी संसाधनों का संयमित उपयोग करने की अपील की है।

  1. इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) को बढ़ावा

राज्य की परिवहन व्यवस्था को ईको-फ्रेंडली बनाने के लिए सरकार एक बड़ी योजना पर काम कर रही है।

चरणबद्ध परिवर्तन: सभी सरकारी वाहनों को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में बदला जाएगा।

उद्देश्य: इससे ईंधन की भारी बचत होगी और पर्यावरण प्रदूषण में भी कमी आएगी।

  1. ‘नेशन फर्स्ट’ और जनभागीदारी का आह्वान

मुख्यमंत्री ने ईंधन संरक्षण को एक जन-आंदोलन बनाने की बात कही है। उन्होंने प्रदेश की जनता से कुछ सुझाव साझा किए:

सार्वजनिक परिवहन: निजी वाहनों के बजाय बस या ट्रेन का अधिक उपयोग करें।

कारपूलिंग: ऑफिस या काम पर जाते समय संसाधनों को साझा करें।

जागरूकता: अनावश्यक रूप से वाहन चलाने से बचें।

“ऊर्जा संरक्षण की दिशा में उठाया गया हमारा छोटा सा कदम देश की ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक मजबूती में बड़ा योगदान दे सकता है। आइए, हम सब मिलकर पर्यावरण की रक्षा का संकल्प लें।”
— विष्णुदेव साय, मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री ने विश्वास जताया कि यदि प्रदेश का हर नागरिक जिम्मेदारी निभाएगा, तो छत्तीसगढ़ हरित ऊर्जा और संसाधन प्रबंधन के क्षेत्र में एक आदर्श राज्य बनकर उभरेगा।

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