एर्राबोर सुशासन शिविर : सुकमा के सुदूर गाँवों तक पहुँचीं सरकारी सेवाएँ, ग्रामीणों में भारी उत्साह

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार की जनहितैषी प्राथमिकताओं के तहत बस्तर के अंदरूनी इलाकों में विकास और सुशासन की नई बयार बह रही है। इसी कड़ी में सुकमा जिले के कोंटा विकासखंड अंतर्गत एर्राबोर में एक बड़े क्लस्टर स्तरीय सुशासन शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में आस-पास की 10 पंचायतों से आए ग्रामीणों की भारी भीड़ उमड़ी। आयोजन के दौरान प्रशासन ने तत्परता दिखाते हुए कुल 452 आवेदनों को स्वीकार किया और मौके पर ही उनका निपटारा करके लोगों को बड़ी राहत दी।
बुनियादी दस्तावेजों और स्वास्थ्य सेवाओं का ऑन-स्पॉट समाधान
शिविर में राजस्व, पंचायत और स्वास्थ्य विभाग समेत विभिन्न सरकारी विभागों के अधिकारी तैनात थे। ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, इसके लिए मौके पर ही जमीन का नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन जैसी राजस्व प्रक्रियाओं को पूरा किया गया। इसके साथ ही आय, जाति, निवास प्रमाण पत्र, राशन कार्ड, जॉब कार्ड और आयुष्मान कार्ड जैसे ज़रूरी दस्तावेज़ तुरंत तैयार कर सौंपे गए। स्वास्थ्य विभाग द्वारा लोगों की जाँच कर आभा आईडी (ABHA ID) भी बनाई गई।
उत्सव के रंग: गोद भराई और अन्नप्राशन
महिला एवं बाल विकास विभाग की ओर से इस शिविर को एक उत्सव का रूप दिया गया। यहाँ नन्हे बच्चों के लिए ‘अन्नप्राशन’ और गर्भवती महिलाओं के लिए ‘गोद भराई’ की रस्म पूरी की गई, जिसके ज़रिए समाज को सुरक्षित मातृत्व और कुपोषण मुक्ति का संदेश दिया गया। जनता में विश्वास जगाने के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती मंगम्मा सोयम और सदस्य श्री कोरसा सन्नू ने खुद आम लोगों की तरह कतार में खड़े होकर अपना स्वास्थ्य परीक्षण कराया।
महिला सशक्तीकरण: 17.50 लाख का ऋण और ‘लखपति दीदी’ का सम्मान
ग्रामीण महिलाओं को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के अंतर्गत बड़ा कदम उठाया गया। शिविर में अलग-अलग महिला स्व-सहायता समूहों को कुल 17.50 लाख रुपये की ऋण राशि सौंपी गई। इसमें से अध्या, हंशिका, प्रतिभा, सरिता और गुलाब समूहों को 13.50 लाख रुपये तथा सूरज समूह को 4 लाख रुपये का लोन स्वीकृत किया गया।
इसके अलावा, क्षेत्र की 5 सफल महिलाओं (सोयम समशाद, सोढ़ी गंगी, बोड्डी मीना, रवा सुक्की और सेमला बजारी) को उनके आर्थिक स्वावलंबन के लिए “लखपति दीदी” के सम्मान से नवाजा गया। इनमें से सोयम समशाद को अपना बिजनेस बढ़ाने के लिए प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत 5 लाख रुपये का व्यक्तिगत लोन चेक भी दिया गया।
अंतिम छोर तक पहुँच रहा है विकास
इस शिविर की सफलता ने यह साबित कर दिया है कि सरकारी योजनाएँ अब कागज़ों से निकलकर सीधे सुदूर वनांचल के गाँवों और ज़रूरतमंदों तक पहुँच रही हैं। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और पंचायत पदाधिकारियों की मौजूदगी में संपन्न हुआ यह आयोजन सुकमा जिला प्रशासन की एक बेहतरीन पहल है, जो अंतिम व्यक्ति को सशक्त और आत्मनिर्भर बना रही है।
















