हीरापुर शिविर में ग्रामीण योजनाओं की बहार : प्रशासनिक सुशासन से चमकी वनांचल की तस्वीर

बीजापुर। सुदूर वनांचल के ग्रामीणों को मुख्यधारा और विकासपरक योजनाओं से जोड़ने के लिए प्रशासन की ओर से एक बड़ी पहल की गई है। उसूर विकासखंड के अंतर्गत आने वाले ग्राम हीरापुर में ‘सुशासन तिहार’ के तहत एक विशाल समाधान शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर में न केवल हीरापुर बल्कि आसपास के कई गांवों जैसे फुतकेल, बासागुड़ा, गगनपल्ली, मल्लेपल्ली, लिंगागिरी, कोरसागुड़ा, चिपुरभट्टी, चिन्नागेल्लूर और पुसबाका से भारी संख्या में ग्रामीण अपनी समस्याओं के निराकरण और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाने पहुँचे।
जनता की चौपाल में हाथों-हाथ हुआ समस्याओं का निपटारा
इस विशेष शिविर की मुख्य विशेषता यह रही कि ग्रामीणों ने सीधे अपनी माँगें और शिकायतें जिला प्रशासन के समक्ष रखीं, जिनमें से कई मामलों का निपटारा मौके पर ही कर दिया गया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जिला पंचायत अध्यक्ष श्रीमती जानकी कोरसा रहीं, जिन्होंने ग्रामीणों को जागरूक करते हुए शासन की समस्त कल्याणकारी योजनाओं में बढ़-चढ़कर भागीदारी करने के लिए प्रेरित किया।
इस शिविर के माध्यम से अलग-अलग विभागों द्वारा ग्रामीणों को दिए गए प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:
भूमि का मालिकाना हक: वर्षों से काबिज जमीन पर ग्रामीणों को कानूनी अधिकार देते हुए 40 हितग्राहियों को व्यक्तिगत वनाधिकार पत्र (पट्टा) सौंपे गए।
दस्तावेज और जागरूकता: “बस्तर मुन्ने” अभियान के जरिए लोगों को पहचान पत्र, राशन कार्ड, बैंक अकाउंट और आयुष्मान कार्ड जैसे आवश्यक कागजात तैयार करवाने की प्रक्रिया समझाई गई।
स्वास्थ्य और सामाजिक सरोकार: स्वास्थ्य विभाग ने लोगों की मुफ्त चिकित्सा जाँच कर दवाइयाँ बांटीं। वहीं महिला एवं बाल विकास विभाग ने कुप्रथाओं के खिलाफ आवाज बुलंद करते हुए “बाल विवाह मुक्त बीजापुर” का संकल्प दिलाया।
कृषि, शिक्षा और आवास: किसानों को सॉइल हेल्थ कार्ड (मृदा स्वास्थ्य कार्ड), स्कूली बच्चों को उनके जाति व जन्म प्रमाण पत्र और प्रधानमंत्री आवास योजना के लाभार्थियों को उनके नए घरों की चाबियाँ सौंपी गईं। इसके साथ ही दिव्यांगजनों को सहायक उपकरण तथा मछुआरों को जाल और आइस बॉक्स प्रदान किए गए।
24 विभागों की प्रदर्शनी से मिली योजनाओं की सीख
ग्रामीणों की सुविधा के लिए कार्यक्रम स्थल पर 24 से अधिक सरकारी विभागों ने अपनी विकासात्मक प्रदर्शनियाँ और स्टॉल लगाए थे। इन स्टॉल्स पर मौजूद अधिकारियों ने लोगों को बेहद सरल भाषा में आवेदन करने के तौर-तरीके सिखाए। शिविर में उमड़ी भारी भीड़ और लोगों के उत्साह को देखकर यह साफ है कि अब सरकारी नीतियां और योजनाएं शहरों से निकलकर सीधे बस्तर के सुदूर अंदरूनी गांवों तक अपनी मजबूत पैठ बना रही हैं।
















