रायपुर में पुलिस का ‘मिडनाइट स्ट्राइक’ : देर रात दी 150 ठिकानों पर दबिश, 20 वारंटी दबोचे गए

रायपुर। रायपुर पुलिस ने राजधानी में अपराधियों के मंसूबों पर पानी फेरने के लिए एक बड़ा ‘कॉम्बिंग गश्त’ अभियान चलाया। 22 और 23 अप्रैल की मध्य रात्रि को पुलिस ने अचानक सक्रिय होकर शहर के मध्य ज़ोन में छापेमारी की, जिससे बदमाशों के बीच हड़कंप मच गया।
भारी बल के साथ मैदान में उतरी पुलिस
डीसीपी सेंट्रल ज़ोन उमेश प्रसाद गुप्ता के नेतृत्व में चले इस ऑपरेशन में पुलिस के आला अधिकारी और करीब 150 जवानों की 10 अलग-अलग टीमें शामिल थीं। पुलिस ने सुनियोजित तरीके से पूरे इलाके को घेरकर जांच शुरू की।
कार्रवाई का मुख्य लेखा-जोखा
इस विशेष अभियान के दौरान पुलिस को बड़ी सफलता हाथ लगी:
वारंटियों की गिरफ्तारी: पुलिस ने कुल 20 वारंटियों को पकड़ा, जिनमें से 11 स्थायी वारंट और 9 गिरफ्तारी वारंट के तहत कार्रवाई की गई।
अपराधों पर लगाम: मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ NDPS Act के तहत 2 मामले और अवैध हथियार रखने पर Arms Act के तहत 1 मामला दर्ज किया गया।
निगरानी और चेकिंग: लगभग 32 संदिग्धों के खिलाफ प्रतिबंधात्मक कार्रवाई की गई है।
पुराने बदमाशों के घरों की तलाशी
पुलिस ने केवल नए मामलों पर ही ध्यान नहीं दिया, बल्कि पुराने अपराधियों पर भी शिकंजा कसा। शहर के लगभग 70 हिस्ट्रीशीटरों और 85 आदतन चोरों व चाकूबाजों के घरों पर अचानक छापा मारा गया। इस ‘सरप्राइज चेकिंग’ का मकसद अपराधियों में कानून का डर पैदा करना और उनकी वर्तमान गतिविधियों की जांच करना था।
हाई-टेक निगरानी और घेराबंदी
सुरक्षा व्यवस्था को पुख्ता करने के लिए पुलिस ने आधुनिक तकनीक का सहारा लिया:
ड्रोन कैमरा: संवेदनशील और घनी आबादी वाले इलाकों की आसमान से निगरानी की गई।
नाकेबंदी: शहर के मुख्य रास्तों पर बैरिकेडिंग कर संदिग्ध वाहनों की सघन तलाशी ली गई।
कॉर्डन एंड सर्च: चिन्हित क्षेत्रों को पूरी तरह सील कर सर्च ऑपरेशन चलाया गया।
इस पूरी कार्रवाई में 55 से अधिक अपराधियों पर गाज गिरी है। पुलिस प्रशासन का स्पष्ट संदेश है कि शहर की शांति भंग करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा और इस तरह के औचक अभियान भविष्य में भी जारी रहेंगे। इस मुस्तैदी से स्थानीय नागरिकों ने राहत की सांस ली है।
















