राजधानी दिल्ली से समंदर तक का रास्ता आसान : रायपुर-विशाखापट्टनम कॉरिडोर से समय और दूरी दोनों होंगी आधी

रायपुर। मध्य और उत्तर भारत को सीधे समुद्री बंदरगाहों से जोड़ने के लिए रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर का निर्माण कार्य अंतिम चरण में है। लगभग ₹16,482 करोड़ से ₹20,000 करोड़ की लागत से बन रहा यह 465 किलोमीटर लंबा 6-लेन ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट देश के 20 प्रमुख शहरों को एक रफ्तार भरे नेटवर्क में पिरोएगा।
परियोजना के मुख्य आकर्षण और लाभ:
समय की भारी बचत: वर्तमान में रायपुर से विशाखापट्टनम (597 किमी) की यात्रा में 12 से 14 घंटे का समय लगता है। नया कॉरिडोर चालू होने पर यह दूरी सिमटकर 5 से 6 घंटे की रह जाएगी।
उत्तर-दक्षिण कनेक्टिविटी: यह मार्ग NH-30, NH-44, यमुना एक्सप्रेसवे और ग्वालियर-आगरा एक्सप्रेसवे के माध्यम से जुड़कर दिल्ली, आगरा, ग्वालियर, रायपुर और विशाखापट्टनम पोर्ट के बीच निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करेगा।
दुर्गम क्षेत्रों का विकास: छत्तीसगढ़ के बस्तर, कांकेर और कोंडागांव से लेकर ओडिशा के नवरंगपुर व कोरापुट जैसे क्षेत्रों को इस राजमार्ग का सीधा लाभ मिलेगा। कांकेर-कोंडागांव के बीच 2.83 किमी लंबी आधुनिक 6-लेन ट्विन टनल भी तैयार की जा रही है।
व्यापार को बढ़ावा: विशाखापट्टनम पोर्ट से सीधी कनेक्टिविटी मिलने के कारण माल ढुलाई, लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक गतिविधियों को अभूतपूर्व तेजी मिलेगी।
प्रगति रिपोर्ट और समय सीमा:
हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत 19 से अधिक पैकेजों में निर्मित इस कॉरिडोर का लगभग 95% काम पूरा हो चुका है। वर्तमान में छत्तीसगढ़ और आंध्र प्रदेश के कुछ हिस्सों में अंतिम चरण का फिनिशिंग वर्क जारी है। इस पूरे प्रोजेक्ट को दिसंबर 2026 तक जनता के लिए पूर्ण रूप से खोलने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
















