छत्तीसगढ़ में RTE की फीस में होगा इजाफा : 14 वर्षों बाद प्रतिपूर्ति राशि बढ़ाने सरकार करेगी समिति का गठन

रायपुर। छत्तीसगढ़ के निजी स्कूलों में शिक्षा का अधिकार (RTE) के तहत पढ़ रहे जरूरतमंद बच्चों की पढ़ाई का खर्च अब बढ़ने जा रहा है। राज्य सरकार ने इसके लिए एक विशेष समिति बनाने का फैसला किया है। स्कूल शिक्षा सचिव ने लोक शिक्षण संचालनालय (DPI) को इस संबंध में जल्द कमेटी गठित करने के निर्देश जारी कर दिए हैं। यह बढ़ोतरी पूरे 14 साल के लंबे अंतराल के बाद होने जा रही है।
इस फैसले के बाद अपनी मांगों को लेकर आंदोलन कर रहे प्राइवेट स्कूल संचालकों ने राहत की सांस ली है और सरकार के साथ अपना असहयोग आंदोलन वापस ले लिया है। हालांकि, यह अभी तय होना बाकी है कि बढ़ी हुई राशि का लाभ निजी स्कूलों को किस शिक्षण सत्र से मिलना शुरू होगा।
क्या है पूरा मामला और क्यों हो रहा था विरोध?
RTE का नियम: शिक्षा का अधिकार कानून के तहत सभी प्राइवेट स्कूलों में 25 फीसदी सीटें आर्थिक रूप से कमजोर और गरीब परिवारों के बच्चों के लिए आरक्षित होती हैं। इन बच्चों की फीस का भुगतान सीधे सरकार द्वारा स्कूलों को किया जाता है।
14 साल से अटकी राशि: जब से यह कानून लागू हुआ है, तब से सरकार प्रति छात्र केवल 7,000 रुपये सालाना की दर से भुगतान कर रही थी। बढ़ती महंगाई के दौर में स्कूल संचालक इस राशि को नाकाफ़ी बताते हुए लंबे समय से इसे बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
एडमिशन पर संकट: मांग पूरी न होने से नाराज निजी स्कूल एसोसिएशन ने नए सत्र (2026-27) में आरटीई कोटे के तहत बच्चों को दाखिला न देने का कड़ा फैसला ले लिया था। यहाँ तक कि पहले चरण की लॉटरी में चुने गए बच्चों को भी प्रवेश के लिए भटकना पड़ा था, हालांकि बाद में छात्रहित में एडमिशन शुरू कर दिए गए थे।
वर्तमान स्थिति: सरकार के इस सकारात्मक कदम और कमेटी बनाने के आश्वासन के बाद गतिरोध पूरी तरह समाप्त हो गया है। आरटीई के तहत पहले चरण की प्रवेश प्रक्रिया पूरी होने के बाद अब प्रशासन ने दूसरे दौर के दाखिले की तैयारियां शुरू कर दी हैं।
















