छत्तीसगढ़

सक्षम आंगनबाड़ी और पोषण 2.0 : कुपोषण मुक्त छत्तीसगढ़ के लिए नई कार्ययोजना तैयार

रायपुर। छत्तीसगढ़ में कुपोषण के विरुद्ध अभियान को और अधिक प्रभावी बनाने के लिए महिला एवं बाल विकास विभाग ने कमर कस ली है। हाल ही में आयोजित राज्य स्तरीय समीक्षा बैठक में विभाग की संचालक डॉ. रेणुका श्रीवास्तव ने “सक्षम आंगनबाड़ी एवं पोषण 2.0” कार्यक्रमों की प्रगति का आकलन किया और अधिकारियों को कड़े निर्देश जारी किए।

बैठक के प्रमुख बिंदु और निर्देश

बैठक के दौरान योजनाओं के जमीनी क्रियान्वयन, वित्तीय प्रबंधन और प्रशासनिक चुनौतियों पर विस्तार से चर्चा की गई। डॉ. श्रीवास्तव ने निम्नलिखित क्षेत्रों पर विशेष बल दिया:

संसाधनों का पारदर्शी उपयोग: सुपोषण अभियान के लिए आवंटित फंड का उपयोग समय सीमा के भीतर और पूरी पारदर्शिता के साथ करने के निर्देश दिए गए।

आंगनबाड़ी केंद्रों का आधुनिकिकरण: प्रदेश में तैयार किए जा रहे 100 मॉडल आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण में गुणवत्ता से समझौता न करने की बात कही गई।

रिक्त पदों की पूर्ति: विभाग में सुचारू कामकाज के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के खाली पदों को जल्द से जल्द भरने की प्रक्रिया शुरू करने को कहा गया।

समय पर भुगतान: कार्यकर्ताओं और पर्यवेक्षकों के मानदेय तथा यात्रा भत्ते (TA) के भुगतान में किसी भी प्रकार की देरी को गंभीरता से लिया जाएगा।

भविष्य की रणनीति (वर्ष 2026-27)

कुपोषण को जड़ से खत्म करने के लिए डॉ. श्रीवास्तव ने आगामी वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए एक लक्ष्य-आधारित रोडमैप तैयार करने का निर्देश दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल डेटा एंट्री पर्याप्त नहीं है, बल्कि पोर्टल पर सटीक और समयबद्ध जानकारी दर्ज करना अनिवार्य है।

“योजनाओं की सफलता तभी सुनिश्चित होगी जब उनका लाभ समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचे। इसके लिए फील्ड स्तर पर सक्रियता और नियमित निगरानी सबसे महत्वपूर्ण है।”
— डॉ. रेणुका श्रीवास्तव, संचालक

तकनीकी और बुनियादी सुधार

बैठक में स्वास्थ्य उपकरणों के रख-रखाव पर भी चर्चा हुई। सभी जिलों को निर्देश दिए गए कि:

वजन मशीनों की मरम्मत और देखरेख प्राथमिकता पर की जाए।

किशोरी बालिकाओं के स्वास्थ्य के लिए सैनिटरी वेंडिंग मशीन और इंसिनरेटर की स्थापना व सुधार कार्य तेजी से पूरे किए जाएं।

इस उच्च स्तरीय बैठक में प्रदेश के सभी जिला कार्यक्रम अधिकारी और संचालनालय के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे, जिन्होंने कुपोषण मुक्ति के संकल्प को दोहराया।

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