छत्तीसगढ़ में उद्योगों के लिए कड़े निर्देश : सिर्फ पौधे लगाना काफी नहीं, उनका जीवित रहना ज़रूरी

रायपुर। छत्तीसगढ़ में औद्योगिक विकास के साथ-साथ पर्यावरण संतुलन बनाए रखने के लिए राज्य सरकार ने कड़ा रुख अपनाया है। रायपुर के बेबीलॉन कैपिटल में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में आवास एवं पर्यावरण मंत्री ओ.पी. चौधरी ने स्पष्ट किया कि उद्योगों के लिए वृक्षारोपण केवल एक कागजी लक्ष्य पूरा करने का जरिया नहीं होना चाहिए। उन्होंने जोर देकर कहा कि लगाए गए पौधों की सुरक्षा और उन्हें जीवित रखना उद्योगों की सबसे बड़ी जिम्मेदारी है।
इस बैठक में छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के अधिकारी और राज्य की बड़ी एवं मध्यम औद्योगिक इकाइयों के शीर्ष प्रतिनिधि शामिल हुए।
विकास और पर्यावरण में संतुलन जरूरी
मंत्री ओ.पी. चौधरी ने साझा किया कि मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में सरकार ‘विकसित छत्तीसगढ़’ के संकल्प पर काम कर रही है। सरकार उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए निवेश-अनुकूल माहौल तो दे रही है, लेकिन पर्यावरण के नियमों की अनदेखी किसी भी कीमत पर बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
“साफ हवा, स्वच्छ पानी और सुरक्षित भविष्य हमारी आने वाली पीढ़ियों का हक है। उद्योगों को अपने कानूनी दायित्वों से आगे बढ़कर नैतिक जिम्मेदारी के रूप में पर्यावरण संरक्षण को अपनाना होगा।”
— ओ.पी. चौधरी, आवास एवं पर्यावरण मंत्री
आधुनिक तकनीक और स्थानीय पौधों पर जोर
बैठक में उद्योगों को पीपल, नीम, आम, कटहल और शिरीष जैसे लंबी उम्र वाले स्थानीय पेड़ों को लगाने की सलाह दी गई। इसके साथ ही, कम समय में घने जंगल तैयार करने के लिए मियावाकी पद्धति जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने पर जोर दिया गया।
प्रमुख समय-सीमाएं और निर्देश:
31 जुलाई तक: वृक्षारोपण का तय लक्ष्य पूरा करना अनिवार्य है।
15 अगस्त तक: सभी गुणवत्तापूर्ण पौधों का रोपण संपन्न हो जाना चाहिए।
डिजिटल ट्रैकिंग: इस बार पूरे अभियान की ऑनलाइन मॉनिटरिंग की जाएगी और सभी उद्योगों को पोर्टल पर इसकी रियल-टाइम जानकारी देनी होगी।
‘पीपल सिटी’ और ‘बर्ड आइलैंड’ के रूप में निखरेगा नया रायपुर
नवा रायपुर को पर्यावरण के अनुकूल बनाने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं:
पीपल सिटी: नया रायपुर में पहले से मौजूद 70 हजार पौधों के अलावा, अगले पांच सालों में 1 लाख से अधिक पीपल के पौधे लगाने की योजना है।
सेंध लेक का कायाकल्प: सेंध लेक को गहरा और सुंदर बनाया जा रहा है, जिससे इसकी जल भराव क्षमता 12 लाख घन मीटर बढ़ जाएगी। झील के बीच बने 3 एकड़ के टापू पर मियावाकी तकनीक से 25 हजार पौधे लगाकर इसे प्रवासी पक्षियों के लिए ‘बर्ड आइलैंड’ (Eco-Hub) के रूप में विकसित किया जा रहा है।
प्रदूषण नियंत्रण और 33% ग्रीन बेल्ट का नियम
आवास एवं पर्यावरण विभाग के सचिव अंकित आनंद ने बताया कि इस साल राज्य में 25 से 30 लाख पौधे लगाने का लक्ष्य है, जिसमें से 22 लाख (लगभग 90%) पौधे लगाए जा चुके हैं। उन्होंने बताया कि 320 से अधिक उद्योगों में प्रदूषण पर नजर रखने के लिए ‘ऑनलाइन सतत उत्सर्जन निगरानी प्रणाली’ काम कर रही है। शुरुआती उल्लंघन पर नोटिस दिए गए हैं, क्योंकि मंडल का मकसद सजा देना नहीं बल्कि सुधार लाना है।
छत्तीसगढ़ पर्यावरण संरक्षण मंडल के सदस्य सचिव राजू अगसिमनी ने उद्योगों को निम्नलिखित कड़े निर्देश दिए:
प्रत्येक औद्योगिक परिसर के कम से कम 33 प्रतिशत हिस्से में हरियाली (ग्रीन बेल्ट) होना अनिवार्य है।
प्रति हेक्टेयर न्यूनतम 2,500 पौधे लगाए जाएं और ‘थ्री-लेयर’ (त्रि-स्तरीय) पौधरोपण तकनीक का इस्तेमाल हो।
पौधों की सिंचाई के लिए फैक्ट्रियों से निकलने वाले रीसायकल (पुनर्चक्रित) पानी का ही उपयोग किया जाए।
प्रदूषण मापने वाले ऑनलाइन एनालाइजर्स को 24 घंटे चालू रखा जाए और हर तीन महीने में उनकी जांच (कैलिब्रेशन) हो।
















