मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल ने जगाई मनुराज के सपनों की नई उम्मीद

कबीरधाम। प्रशासन की जनकल्याणकारी नीतियां और त्वरित न्याय प्रणाली आज समाज के अंतिम पायदान पर खड़े लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव ला रही हैं। इसका एक जीवंत उदाहरण हाल ही में देखने को मिला, जब ‘सुशासन तिहार’ के मंच से एक बेबस जिंदगी को आत्मनिर्भरता के नए पंख मिल गए।
कबीरधाम जिले के पण्डरिया तहसील अंतर्गत ग्राम मोहगांव के रहने वाले मनुराज बंजारे (जो 85% अस्थि बाधित दिव्यांगता से जूझ रहे हैं) के जीवन में अब एक नया सवेरा आया है। उन्होंने प्रशासन के समक्ष तिहार के दौरान एक बैटरी चालित मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल के लिए गुहार लगाई थी। समाज कल्याण विभाग ने संवेदनशीलता दिखाते हुए इस पर तुरंत कदम उठाया और मनुराज को यह आधुनिक वाहन सौंप दिया। इस छोटी सी मदद ने मनुराज के पैरों को वो रफ़्तार दे दी है, जिसकी उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
मुश्किलों से थमा था पढ़ाई का सफ़र
मनुराज के जीवन का सफ़र हमेशा से चुनौतियों भरा रहा है। सिर से पिता का साया उठ जाने के बाद उनके कंधों पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। शारीरिक अक्षमता और घर की कंगाली के कारण चाहकर भी वे पांचवीं क्लास के आगे कदम नहीं बढ़ा सके। अपनी इस लाचारी और भविष्य के अंधकार को देखकर वे मानसिक रूप से काफी टूट चुके थे और निराशा के भंवर में डूब रहे थे।
अब आत्मनिर्भरता और शिक्षा की ओर बढ़ेंगे कदम
लेकिन शासन की इस पहल ने मनुराज की दुनिया ही बदल दी है। मोटराइज्ड ट्राईसाइकिल की सीट पर बैठते ही उनका खोया हुआ आत्मविश्वास वापस लौट आया है। भावुक होते हुए मनुराज ने बताया:
“अब दूरी मेरे आड़े नहीं आएगी। मैं आसानी से स्कूल जा सकूँगा और जो पढ़ाई सालों पहले छूट गई थी, उसे दोबारा शुरू करूँगा। यह सिर्फ एक गाड़ी नहीं, बल्कि मेरे स्वाभिमान और एक बेहतर कल की चाबी है।”
इस सौगात को पाकर मनुराज के चेहरे की ख़ुशी देखने लायक थी। उन्होंने इस मानवीय प्रयास के लिए प्रशासन और सरकार का सहृदय आभार व्यक्त किया है। निश्चित रूप से, शासन की ऐसी संवेनशील पहलें दिव्यांगजनों को समाज की मुख्यधारा से जोड़कर उनके भीतर आगे बढ़ने का नया हौसला फूंक रही हैं।
















