वेदांता हादसा : नवीन जिंदल ने चेयरमैन अनिल अग्रवाल पर FIR को बताया अनुचित, निष्पक्ष जांच की मांग की

रायपुर। छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले में स्थित वेदांता पावर प्लांट में हुए भीषण हादसे ने अब एक नई बहस छेड़ दी है। इस दुर्घटना में जान गंवाने वाले श्रमिकों की संख्या बढ़कर 23 हो गई है, जबकि 13 अन्य का उपचार अभी भी चल रहा है। पुलिस ने इस मामले में वेदांता समूह के चेयरमैन अनिल अग्रवाल सहित कुल 10 लोगों के विरुद्ध प्राथमिकी (FIR) दर्ज की है। प्रशासन के इस कदम पर जाने-माने उद्योगपति नवीन जिंदल ने आपत्ति जताई है।
जांच से पहले कार्रवाई पर सवाल
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए नवीन जिंदल ने कहा कि बिना किसी प्रारंभिक जांच के सीधे चेयरमैन अनिल अग्रवाल का नाम FIR में शामिल करना चिंताजनक है। उन्होंने तर्क दिया कि किसी भी कानूनी कार्रवाई से पहले गहन जांच अनिवार्य होनी चाहिए, ताकि सबूतों के आधार पर ही जिम्मेदारी तय की जा सके।
‘पीड़ितों को न्याय मिले, पर प्रक्रिया सही हो’
हादसे पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए जिंदल ने कहा कि 20 परिवारों ने अपने प्रियजनों को खोया है, जो एक अपूरणीय क्षति है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
प्रभावित परिवारों को उचित मुआवजा मिलना चाहिए।
उनके लिए आजीविका सहायता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
घटना की विस्तृत जांच में कोई समझौता नहीं होना चाहिए।
हालांकि, उन्होंने यह भी जोड़ा कि अनिल अग्रवाल जैसे व्यक्ति, जिन्होंने शून्य से शुरुआत कर एक वैश्विक स्तर का उद्योग खड़ा किया है, उनका प्लांट के दैनिक संचालन में कोई सीधा हस्तक्षेप नहीं होता। ऐसे में उन्हें सीधे तौर पर नामजद करना तर्कसंगत नहीं लगता।
सरकारी बनाम निजी क्षेत्र के मानकों पर बहस
नवीन जिंदल ने सार्वजनिक क्षेत्र (PSU) का उदाहरण देते हुए सवाल उठाया कि जब रेलवे या किसी सरकारी उपक्रम में बड़ी दुर्घटनाएं होती हैं, तो क्या उनके चेयरमैन पर FIR दर्ज की जाती है? उन्होंने मांग की कि न्याय के मानक निजी और सरकारी, दोनों क्षेत्रों के लिए समान होने चाहिए। जिंदल के अनुसार, पहले साक्ष्य जुटाए जाने चाहिए और उसके बाद ही दोषी पाए जाने पर उचित कार्रवाई की जानी चाहिए।
















