देश के बच्चे पढ़ेंगे छत्तीसगढ़ का इतिहास, कोर्स में मुकुटधर पांडेय, सप्रे और ‘गंगाराम मगरमच्छ’ की होगी कहानी

रायुपर। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने अपनी नई पाठ्यपुस्तकों में छत्तीसगढ़ के इतिहास, साहित्य और स्थानीय कथाओं को विशेष स्थान दिया है। कक्षा 5वीं और 8वीं के सामाजिक विज्ञान विषय के नए पाठ्यक्रम के माध्यम से देशभर के छात्र अब राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक पृष्ठभूमि से परिचित हो सकेंगे।
पाठ्यक्रम में किए गए प्रमुख बदलाव:
स्थानीय महापुरुषों का समावेश: छायावाद के प्रमुख स्तंभ पंडित मुकुटधर पांडेय की जीवनी को कक्षा 8वीं के पाठ्यक्रम में शामिल किया गया है। इसके अलावा, पंडित माधवराव सप्रे से संबंधित अध्याय को अब कक्षा 6वीं के बजाय कक्षा 8वीं में पढ़ाया जाएगा।
‘गंगाराम’ मगरमच्छ की अनूठी कहानी: बेमेतरा जिले के बावा मोहतरा गांव के प्रसिद्ध मगरमच्छ ‘गंगाराम’ का उल्लेख कक्षा 5वीं की किताब में मिलेगा। यह मगरमच्छ लगभग 100 वर्षों तक गांव के तालाब में रहा और ग्रामीणों के साथ उसका एक अटूट व आत्मीय संबंध था, जिसमें उसने कभी किसी को नुकसान नहीं पहुंचाया।
ऐतिहासिक संदर्भों में संशोधन: इतिहास के एक अध्याय का शीर्षक बदलकर ‘जो जीता वही बाजीराव’ किया गया है, जो पेशवा बाजीराव द्वारा अपने जीवनकाल में लड़े गए सभी 40 युद्धों में उनकी अजेय सफलता को रेखांकित करता है।
राष्ट्रीय प्रतीकों की वापसी: पिछले कुछ समय से पाठ्यक्रमों में उपेक्षित रहे राष्ट्रगान, राष्ट्रीय ध्वज, राष्ट्रगीत, राष्ट्रभाषा और राष्ट्रीय चिह्नों से संबंधित अध्यायों को पुनः पूरे सम्मान के साथ शामिल किया गया है।
पाठ्य सामग्री का संक्षिप्तीकरण: अध्यापकों और विद्यार्थियों के बोझ को कम करने के उद्देश्य से सामाजिक विज्ञान के कुल अध्यायों की संख्या 22 से घटाकर 12 कर दी गई है।
















