बीते ढाई वर्षों में श्रमिक कल्याण योजनाओं से 17.82 लाख मजदूरों को मिला सीधा लाभ

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार ने पिछले ढाई सालों में प्रशासनिक सुधारों, डिजिटल नवाचारों और सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के माध्यम से राज्य के श्रमिक वर्ग के जीवन स्तर में व्यापक बदलाव लाया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और श्रम व उद्योग मंत्री लखनलाल देवांगन की अगुवाई में राज्य के संगठित, असंगठित तथा निर्माण क्षेत्रों से जुड़े श्रमिकों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में कई अहम पहल की गई हैं।
प्रशासनिक विस्तार और 33 जिलों में सीधी पहुँच
श्रमिकों को विभागीय सुविधाओं का सहज लाभ देने के लिए राज्य के सभी 33 जिलों में श्रम कार्यालयों का संचालन शुरू कर दिया गया है। हाल ही में गठित 5 नए जिलों—मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, खैरागढ-छुईखदान-गंडई, सारंगढ़-बिलाईगढ़, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर एवं सक्ती—में श्रम अधिकारी कार्यालयों के लिए 20 नए पदों का सृजन किया गया है। वर्तमान में प्रदेश में 10 सहायक श्रमायुक्त और 23 श्रम पदाधिकारी कार्यालय कार्यरत हैं।
पारदर्शिता और डिजिटल तकनीकी का उपयोग
श्रमिक पंजीयन और आवेदन प्रक्रिया को सरल व पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से ‘श्रमेव जयते’ मोबाइल ऐप और नई यूजर-फ्रेंडली आधिकारिक वेबसाइट (shramevjayate.cg.gov.in) लॉन्च की गई है। सभी तरह की सहायता राशियों के वितरण के लिए प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली लागू की गई है। इसके अतिरिक्त, दूरस्थ क्षेत्रों के श्रमिकों की सहायता के लिए 24 घंटे संचालित ‘मुख्यमंत्री श्रमिक सहायता केंद्र’ और मोबाइल शिविरों के ज़रिए पंजीयन व नवीनीकरण का कार्य तेजी से किया जा रहा है।
श्रम सुधार और प्रमुख उपलब्धियाँ
राज्य में दुकानों एवं स्थापना अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन, फिक्स्ड टर्म एम्प्लॉयमेंट, महिला श्रमिकों के लिए रात्रिकालीन कार्य सुविधा और फैक्ट्री लाइसेंस अवधि के विस्तार जैसे श्रम नियमों में संशोधन किए गए हैं।
1 जनवरी 2024 से 30 जून 2026 की अवधि के बीच की प्रमुख उपलब्धियाँ:
नया पंजीकरण: लगभग 12.65 लाख नए श्रमिकों का पंजीयन किया गया।
कुल लाभार्थी: 17.82 लाख से अधिक श्रमिकों को विभिन्न योजनाओं के तहत 800 करोड़ रुपये से अधिक की राशि का लाभ पहुँचाया गया।
क्षेत्रवार आवंटन: निर्माण श्रमिकों को करीब 780 करोड़ रुपये और असंगठित क्षेत्र के श्रमिकों को लगभग 187 करोड़ रुपये हस्तांतरित किए गए।
सामाजिक सुरक्षा एवं कल्याणकारी योजनाएँ
आवास सहायता: ‘मुख्यमंत्री निर्माण श्रमिक आवास सहायता योजना’ के तहत मिलने वाली राशि को बढ़ाकर 1.50 लाख रुपये कर दिया गया है।
मातृत्व लाभ: ‘मिनीमाता महतारी जतन योजना’ के ज़रिए निर्माण व असंगठित क्षेत्र की 1.60 लाख से ज़्यादा महिला श्रमिकों को मातृत्व सहायता दी गई है।
रसोई सहायता: ‘शहीद वीरनारायण सिंह श्रम अन्न योजना’ के अंतर्गत पंजीकृत श्रमिकों को मात्र 5 रुपये में पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।
शिक्षा प्रोत्साहन: श्रमिक परिवारों के बच्चों के लिए मेधावी शिक्षा सहायता, छात्रवृत्ति तथा प्रतियोगी परीक्षाओं की निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था लागू की गई है।
वर्तमान में राज्य श्रम कल्याण मंडलों के माध्यम से कुल 67 कल्याणकारी योजनाएं संचालित की जा रही हैं, जिनका मुख्य उद्देश्य श्रमिक परिवारों को सामाजिक व आर्थिक सुरक्षा प्रदान करना है।
















