रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में घुटना व कूल्हा प्रत्यारोपण शुरू : आयुष्मान कार्ड से अब लाखों का इलाज होगा मुफ़्त

रायगढ़। रायगढ़ जिले के मरीजों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अब घुटने और कूल्हे (जॉइंट रिप्लेसमेंट) की जटिल सर्जरी के लिए बड़े शहरों के निजी अस्पतालों के चक्कर काटने और लाखों रुपये लुटाने की मजबूरी खत्म हो गई है। रायगढ़ मेडिकल कॉलेज से संबद्ध संत बाबा गुरु घासीदास जी स्मृति शासकीय चिकित्सालय के अस्थि रोग विभाग में अब अत्याधुनिक तकनीक से ये ऑपरेशन सफलतापूर्वक किए जा रहे हैं।
निजी अस्पतालों के भारी खर्च से मिलेगी मुक्ति
आमतौर पर किसी निजी अस्पताल में जॉइंट रिप्लेसमेंट का खर्च 2.5 से 3 लाख रुपये तक आता है, जो मध्यमवर्गीय और गरीब परिवारों के लिए एक बड़ा आर्थिक बोझ होता है। मेडिकल कॉलेज के अधिष्ठाता डॉ. संतोष कुमार ने बताया कि अब यही उच्चस्तरीय सर्जरी रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान योजना के तहत पूरी तरह निःशुल्क उपलब्ध है।
शासन की पहल और आधुनिक बुनियादी ढांचा
मुख्यमंत्री श्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में प्रदेश की स्वास्थ्य सुविधाओं को सुदृढ़ किया जा रहा है। स्वास्थ्य मंत्री श्री श्याम बिहारी जायसवाल और वित्त मंत्री श्री ओ.पी. चौधरी के विशेष मार्गदर्शन में रायगढ़ मेडिकल कॉलेज का विस्तार किया गया है। अस्पताल अधीक्षक डॉ. मनोज कुमार मिंज के अनुसार, विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम और उन्नत ओटी (OT) सुविधाओं के कारण अब स्थानीय स्तर पर ही जटिल केस हैंडल किए जा रहे हैं।
सफल सर्जरी: 28 वर्षीय छविराज की बदली जिंदगी
इस नई सुविधा का लाभ उठाने वाले मरीजों में 28 वर्षीय छविराज कुमार भी शामिल हैं। लंबे समय से पैर की गंभीर समस्या से जूझ रहे छविराज को निजी डॉक्टरों ने ढाई लाख का खर्च बताया था।
“आर्थिक तंगी के कारण मैं इलाज नहीं करा पा रहा था, लेकिन मेडिकल कॉलेज में आयुष्मान योजना से मेरा ऑपरेशन मुफ़्त हुआ। सर्जरी के अगले ही दिन से मैं चलने लगा और अब पूरी तरह स्वस्थ महसूस कर रहा हूँ।” – छविराज कुमार, मरीज
विशेषज्ञों की सलाह: दर्द को न करें नजरअंदाज
अस्थि रोग विभागाध्यक्ष डॉ. प्रवीण जांगड़े और एनेस्थीसिया विभागाध्यक्ष डॉ. ए.एम. लकड़ा की टीम अब तक 10 सफल सर्जरी (5 कूल्हा और 5 घुटना प्रत्यारोपण) कर चुकी है।
इन समस्याओं में कारगर है सर्जरी:
गठिया (Arthritis) और ऑस्टियोआर्थराइटिस।
दुर्घटना के कारण जोड़ों में आई गंभीर क्षति।
घुटने या कूल्हे का पुराना और असहनीय दर्द।
डॉ. जांगड़े ने अपील की है कि यदि आप चलने-फिरने में असमर्थ हैं या जोड़ों के पुराने दर्द से परेशान हैं, तो इसे नजरअंदाज करने के बजाय तुरंत मेडिकल कॉलेज की ओपीडी में विशेषज्ञ परामर्श लें।
















