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पीएनजी कनेक्शन लेने के बाद भी सुरक्षित रहेगा एलपीजी सिलेंडर, सरकार ने बदले नियम

नई दिल्ली (एजेंसी)। घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं के लिए राहत भरी खबर है। केंद्र सरकार ने एलपीजी आपूर्ति और वितरण से जुड़े नियमों में एक बड़ा और महत्वपूर्ण बदलाव किया है। सरकार द्वारा जारी नए ‘लिक्विफाइड पेट्रोलियम गैस (आपूर्ति और वितरण विनियमन) संशोधन आदेश 2026’ के तहत, अब पाइप वाली प्राकृतिक गैस (PNG) कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं को अपना पुराना एलपीजी (LPG) सिलेंडर सरेंडर करने की जरूरत नहीं होगी।

इस नए कदम का मुख्य उद्देश्य उन लोगों को राहत देना है जो पीएनजी का रुख कर रहे हैं, लेकिन भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अपना एलपीजी कनेक्शन भी सुरक्षित रखना चाहते हैं।

उपभोक्ताओं के पास होंगे ये दो विकल्प

नए नियमों के लागू होने के बाद, जो उपभोक्ता अपने घरों में पीएनजी कनेक्शन लगवाएंगे, उन्हें सरकार दो बेहतरीन विकल्प दे रही है:

30 दिनों में कनेक्शन बंद करने की सुविधा: यदि कोई उपभोक्ता पूरी तरह पीएनजी पर निर्भर होना चाहता है, तो वह कनेक्शन मिलने के 30 दिनों के भीतर एलपीजी सेवा को बंद करने के लिए आवेदन कर सकता है।

ट्रांसफर वाउचर (सुरक्षित रखने का विकल्प): उपभोक्ता चाहें तो अपने एलपीजी कनेक्शन को पूरी तरह खत्म करने के बजाय एक ‘ट्रांसफर वाउचर’ ले सकते हैं। इससे उनका कनेक्शन भविष्य के लिए सुरक्षित हो जाएगा।

किसे मिलेगा सबसे ज्यादा फायदा?

यह नया नियम खासतौर पर उन लोगों के लिए बेहद मददगार साबित होगा जो नौकरी, बिजनेस या पढ़ाई के सिलसिले में अक्सर एक शहर से दूसरे शहर शिफ्ट होते रहते हैं।

अक्सर देखा गया है कि कई इलाकों में आज भी पीएनजी की सुविधा उपलब्ध नहीं है। ऐसे में ट्रांसफर वाउचर की मदद से किराएदार, छात्र और ट्रांसफरेबल जॉब वाले लोग जब भी किसी नए या गैर-पीएनजी क्षेत्र में जाएंगे, तो वे बिना किसी झंझट के अपने पुराने एलपीजी कनेक्शन को दोबारा चालू (बहाल) करवा सकेंगे।

क्यों लिया गया यह फैसला?

अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चल रहे मिडिल ईस्ट संकट के कारण एलपीजी सिलेंडरों की वेटिंग लिस्ट को कम करना सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है। यही वजह है कि सरकार लोगों को लगातार पीएनजी अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है। हाल ही में प्रशासन ने पीएनजी आवेदन पर महज 7 दिनों के भीतर कार्रवाई करने के निर्देश भी दिए थे।

इस नए संशोधन के बाद अब उपभोक्ताओं को बार-बार नया गैस कनेक्शन लेने की लंबी कागजी प्रक्रिया से मुक्ति मिलेगी, साथ ही देश में एलपीजी और पीएनजी दोनों ईंधनों के बीच एक बेहतर तालमेल देखने को मिलेगा।

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