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तेल-गैस आपूर्ति संकट के बीच जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से बात की, जानें किस मुद्दे पर बनी सहमति

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और वैश्विक तेल-गैस आपूर्ति पर मंडराते संकट के बीच भारत ने अपने कूटनीतिक प्रयास तेज कर दिए हैं। विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरान, जर्मनी और दक्षिण कोरिया के अपने समकक्षों से टेलीफोन पर वार्ता कर क्षेत्र की स्थिति और ऊर्जा सुरक्षा पर विस्तृत चर्चा की।

ईरान के साथ संवाद और होर्मुज जलडमरूमध्य का संकट

ईरान पर हालिया सैन्य कार्रवाइयों के बाद, विदेश मंत्री जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची से तीसरी बार संपर्क साधा।

मुख्य चिंता: होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ती हलचल, जहाँ से दुनिया का लगभग 20% कच्चा तेल और एलएनजी गुजरता है। इसके आंशिक बंद होने से वैश्विक बाजारों में कीमतों में भारी उछाल आया है।

भारत का रुख: जयशंकर ने ईरान और क्षेत्र के बिगड़ते हालात पर भारत की गंभीर चिंता व्यक्त की। दोनों नेता इस मुद्दे पर निरंतर संपर्क बनाए रखने के लिए सहमत हुए हैं।

जर्मनी और दक्षिण कोरिया के साथ रणनीतिक चर्चा

ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए भारत केवल ईरान ही नहीं, बल्कि अन्य प्रमुख वैश्विक साझेदारों के साथ भी समन्वय कर रहा है।

जर्मनी: जयशंकर ने जर्मन विदेश मंत्री जोहान वेडफुल से बात की। दोनों नेताओं ने संघर्ष के विस्तार और इसके आर्थिक प्रभावों पर अपने विचार साझा किए।

दक्षिण कोरिया: दक्षिण कोरियाई विदेश मंत्री चो ह्यून के साथ हुई वार्ता में न केवल ऊर्जा संकट पर चर्चा हुई, बल्कि द्विपक्षीय संबंधों को भी प्राथमिकता दी गई।

महत्वपूर्ण: दक्षिण कोरियाई राष्ट्रपति ली जे-म्युंग के आगामी दो महीनों में भारत दौरे की संभावना है, जिससे दोनों देशों के बीच रणनीतिक और आर्थिक सहयोग को नई मजबूती मिलने की उम्मीद है।

भारत का प्राथमिक लक्ष्य इस युद्धग्रस्त स्थिति में अपने नागरिकों की सुरक्षा और देश की ऊर्जा जरूरतों को निर्बाध बनाए रखना है। इसीलिए नई दिल्ली अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लगातार संवाद का रास्ता अपना रही है।

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