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ईरान का शांति प्रस्ताव : राष्ट्रपति पेजेशकियन ने युद्ध विराम के लिए रखीं तीन मुख्य शर्तें

नई दिल्ली (एजेंसी)। ईरान और अमेरिका-इजरायल गठबंधन के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने अब वैश्विक स्तर पर चिंता पैदा कर दी है। इस युद्ध का सीधा असर अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था, विशेषकर तेल और गैस की कीमतों पर पड़ रहा है। होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ती सैन्य गतिविधियों के कारण ऊर्जा आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे दुनिया भर में महंगाई का खतरा मंडराने लगा है।

इसी गंभीर स्थिति के बीच, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने पहली बार उन शर्तों का खुलासा किया है, जिनके आधार पर तेहरान इस युद्ध को रोकने के लिए तैयार है।

शांति के लिए ईरान की तीन मांगें

राष्ट्रपति पेजेशकियन ने स्पष्ट किया कि यदि अंतरराष्ट्रीय समुदाय और विपक्षी देश निम्नलिखित तीन बिंदुओं पर सहमत होते हैं, तभी जंग थमेगी:

वैध अधिकारों की मान्यता: ईरान के संप्रभु और कानूनी अधिकारों को वैश्विक स्तर पर स्वीकार किया जाए।

क्षतिपूर्ति (हर्जाना): युद्ध के दौरान हुए नुकसान की पूरी भरपाई की जाए।

सुरक्षा गारंटी: भविष्य में किसी भी संभावित हमले को रोकने के लिए ठोस अंतरराष्ट्रीय आश्वासन और गारंटी दी जाए।

“रूस और पाकिस्तान के नेतृत्व के साथ चर्चा के दौरान, मैंने क्षेत्रीय शांति के प्रति ईरान की प्रतिबद्धता को दोहराया है। लेकिन शांति तभी संभव है जब हमारे अधिकारों का सम्मान हो और सुरक्षा की पक्की गारंटी मिले।” — मसूद पेजेशकियन (सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर)

संघर्ष की पृष्ठभूमि और आर्थिक प्रभाव

यह ताज़ा टकराव 28 फरवरी, 2026 को तब शुरू हुआ जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान के खिलाफ एक संयुक्त सैन्य अभियान चलाया। जवाब में ईरान ने न केवल इजरायल पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, बल्कि पड़ोसी देशों में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों को भी निशाना बनाया।

वर्तमान स्थिति का विश्लेषण:

ऊर्जा संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव के कारण कच्चे तेल के टैंकरों की आवाजाही प्रभावित हुई है।

वैश्विक बाजार: सप्लाई चेन टूटने से वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ गई है।

कूटनीतिक प्रयास: ईरान अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर अंतरराष्ट्रीय समर्थन जुटाने की कोशिश कर रहा है ताकि अमेरिका पर दबाव बनाया जा सके।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इन शर्तों पर कोई ठोस समझौता नहीं होता, तो मध्य पूर्व का यह संकट एक लंबी और विनाशकारी जंग का रूप ले सकता है, जिसका खामियाजा पूरी दुनिया को भुगतना होगा।

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