मध्यप्रदेश

साहित्यिक धरोहर के रक्षक हैं कवि सम्मेलन : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने हाल ही में राजधानी के अटल पथ पर आयोजित ‘अखिल भारतीय कवि सम्मेलन’ में शिरकत की। दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम का आगाज़ करते हुए उन्होंने भारतीय काव्य परंपरा और भाषाई विविधता पर अपने विचार साझा किए।

प्रमुख बिंदु: संस्कृति, साहित्य और पर्यटन

मुख्यमंत्री के संबोधन के मुख्य अंश निम्नलिखित हैं:

काव्य परंपरा का महत्व: डॉ. यादव ने कहा कि भारत की उर्वर भूमि ने सदैव महान कवियों को जन्म दिया है। कवि सम्मेलन केवल मनोरंजन का साधन नहीं, बल्कि हमारी सदियों पुरानी साहित्यिक विरासत के जीवंत संवाहक हैं।

धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा: सरकार प्रदेश के पवित्र स्थलों को जोड़ने के लिए प्रतिबद्ध है। इसी कड़ी में भोपाल से ओरछा के बीच जल्द ही हेलीकॉप्टर सेवा शुरू की जाएगी, जिससे श्रद्धालुओं और पर्यटकों को सुगमता होगी।

ऐतिहासिक गौरव: उन्होंने राजा भोज के स्वर्ण युग का स्मरण करते हुए बताया कि भोपाल की धरती हमेशा से ज्ञान और कला की उपासक रही है। बाणभट्ट से लेकर केशवदास तक, प्रदेश के महान साहित्यकारों ने विश्व स्तर पर अपनी छाप छोड़ी है।

एक भारत-श्रेष्ठ भारत: चैत्र प्रतिपदा और गुड़ी पड़वा जैसे त्योहारों का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अलग-अलग नामों से मनाए जाने वाले ये उत्सव हमारी राष्ट्रीय एकता और सांस्कृतिक विविधता के प्रतीक हैं।

रजत जयंती समारोह और सम्मान

यह विशेष कवि सम्मेलन ‘कर्मश्री’ संस्था द्वारा आयोजित किया गया था, जो अपनी स्थापना के 25 वर्ष (रजत जयंती) पूर्ण कर रही है। मुख्यमंत्री ने इस निरंतरता के लिए विधायक रामेश्वर शर्मा को बधाई दी। कार्यक्रम के दौरान उत्कृष्ट सामाजिक सेवा करने वाली विभिन्न समितियों और देश के प्रतिष्ठित कवियों को पुष्पगुच्छ देकर सम्मानित किया गया।

“कवियों की वाणी ही वह माध्यम है जिसने आज की युवा पीढ़ी के भीतर साहित्य के प्रति प्रेम को जीवित रखा है।”
— डॉ. मोहन यादव, मुख्यमंत्री

मंच की गरिमा

इस भव्य काव्य संध्या में सुप्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास, दिनेश बावरा, सुदीप भोला और सान्या राय जैसे दिग्गजों ने अपनी रचनाओं से श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। कार्यक्रम में महापौर मालती राय, विधायक भगवानदास सबनानी सहित कई जनप्रतिनिधि और बड़ी संख्या में काव्य प्रेमी उपस्थित रहे।

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