छत्तीसगढ़ में शांति का नया उदय, हिंसा त्यागकर मुख्यधारा से जुड़े 25 माओवादी : मुख्यमंत्री साय

रायपुर। छत्तीसगढ़ के बस्तर अंचल (दण्डकारण्य) में दशकों से चली आ रही अशांति के बादल अब छंटने लगे हैं। आज का दिन राज्य के इतिहास में एक निर्णायक मोड़ के रूप में देखा जा रहा है, जहाँ “पूना मारगेम” (पुनर्वास से पुनर्जीवन) अभियान के तहत नक्सलवाद को तगड़ा झटका लगा है। मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस बदलाव को ‘हिंसा पर विश्वास की विजय’ करार दिया है।
आत्मसमर्पण और नई शुरुआत
राज्य सरकार की पुनर्वास नीति से प्रभावित होकर 25 माओवादी कैडरों ने, जिनमें 12 महिलाएं भी शामिल हैं, हथियार डालकर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने का निर्णय लिया है। इन आत्मसमर्पित माओवादियों पर कुल ₹1.47 करोड़ का इनाम घोषित था।
मुख्यमंत्री ने इस कदम की सराहना करते हुए कहा:
“यह केवल आत्मसमर्पण नहीं है, बल्कि लोकतंत्र और जनशक्ति के प्रति अडिग विश्वास की वापसी है। सालों से डर और हिंसा के साये में जी रहे लोगों का अब सरकार की नीतियों पर भरोसा बढ़ा है।”
नक्सलियों के तंत्र पर करारी चोट
सुरक्षा बलों की निरंतर सक्रियता और रणनीतिक कौशल के कारण माओवादी नेटवर्क अब बिखरने की कगार पर है। इस अभियान के दौरान न केवल कैडरों ने आत्मसमर्पण किया, बल्कि सुरक्षाबलों को बड़ी सफलताएं भी हाथ लगी हैं:
हथियारों की बरामदगी: 93 घातक अत्याधुनिक हथियार जब्त किए गए।
वित्तीय प्रहार: माओवादी नेटवर्क से जुड़ी ₹14.06 करोड़ की संपत्ति और अन्य सामग्री बरामद की गई।
रणनीतिक सफलता: दण्डकारण्य क्षेत्र में नक्सलियों की रसद और सूचना तंत्र को पूरी तरह ध्वस्त कर दिया गया है।
शांति और विकास की ओर बढ़ते कदम
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने रेखांकित किया कि 31 मार्च 2026 की यह तिथि प्रदेश के लिए एक स्वर्णिम अध्याय की शुरुआत है। उन्होंने विश्वास जताया कि बस्तर अब नक्सलवाद के काले साये से मुक्त होकर विकास और शांति के पथ पर तेजी से आगे बढ़ेगा।
















