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भारत-रूस रणनीतिक संबंध : अमेरिकी हस्तक्षेप पर मॉस्को का कड़ा जवाब

नई दिल्ली (एजेंसी)। नई दिल्ली में रूसी राजदूत डेनिस अलीपोव ने भारत के साथ व्यापारिक संबंधों, विशेषकर तेल बाजार को लेकर अमेरिका के बढ़ते दखल पर कड़ा ऐतराज जताया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि रूस अंतरराष्ट्रीय संबंधों में किसी भी प्रकार के बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करता और भारत की स्वतंत्र विदेश नीति की खुले दिल से सराहना करता है।

मुख्य बिंदु: रूसी राजदूत का वक्तव्य

अमेरिकी दबाव की आलोचना: अलीपोव ने कहा कि अमेरिका द्वारा भारतीय बाजार में रूसी तेल की आपूर्ति को बाधित करने की कोशिशें वैश्विक व्यापार नियमों के विरुद्ध हैं। उन्होंने इसे अनुचित व्यापार पद्धति करार दिया।

ऊर्जा सहयोग में मजबूती: राजदूत के अनुसार, रूस और भारत के बीच ऊर्जा क्षेत्र में साझेदारी पहले से कहीं अधिक मजबूत हुई है। भारत द्वारा रूसी तेल के आयात में हुई वृद्धि दोनों देशों के गहरे आर्थिक संबंधों का प्रमाण है।

मध्य पूर्व संकट और तेल कूटनीति: पश्चिम एशिया (मिडिल ईस्ट) में बढ़ते तनाव पर चिंता जताते हुए उन्होंने इसे “ऑयल डिसरप्शन डिप्लोमेसी” (तेल व्यवधान कूटनीति) का हिस्सा बताया। उन्होंने जोर दिया कि ऐसी वैश्विक अस्थिरता के दौर में भारत-रूस का सहयोग और भी अनिवार्य हो जाता है।

रणनीतिक साझेदारी और भविष्य की रूपरेखा

रूस और भारत के बीच द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाई देने के लिए निम्नलिखित कदम उठाए जा रहे हैं:

शिखर सम्मेलन की तैयारी: राजदूत ने संकेत दिया कि मॉस्को इस वर्ष प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की रूस यात्रा का बेसब्री से इंतजार कर रहा है। वार्षिक शिखर बैठकों की यह परंपरा दोनों देशों की रणनीतिक साझेदारी को और प्रगाढ़ बनाती है।

आर्थिक प्रतिबद्धता: मौजूदा वैश्विक चुनौतियों के बावजूद, दोनों देश व्यापार और आर्थिक मोर्चे पर एक-दूसरे का साथ देने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।

निष्कर्ष: रूस का यह हालिया बयान न केवल भारत के साथ उसके मजबूत होते रिश्तों को दर्शाता है, बल्कि यह भी स्पष्ट करता है कि दोनों देश एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World Order) के पक्षधर हैं, जहाँ किसी एक शक्ति का दबाव काम नहीं करता।

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