पश्चिम एशिया में शांति की नई किरण : भारत ने किया संघर्ष विराम का समर्थन

नई दिल्ली (एजेंसी)। हाल ही में अमेरिका, इस्राइल और ईरान के बीच घोषित दो सप्ताह के युद्धविराम ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर कूटनीतिक समाधान की उम्मीदें जगा दी हैं। भारत सरकार ने इस कदम की सराहना करते हुए क्षेत्र में स्थिरता आने की संभावना जताई है। भारतीय विदेश मंत्रालय ने आधिकारिक बयान जारी कर इस निर्णय का स्वागत किया और इसे शांति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया।
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा: “हम इस अस्थायी संघर्ष विराम का तहे दिल से स्वागत करते हैं। भारत का हमेशा से यह मानना रहा है कि तनाव कम करना, आपसी बातचीत और कूटनीति ही किसी भी विवाद को सुलझाने के एकमात्र प्रभावी रास्ते हैं। हमें उम्मीद है कि यह पहल पश्चिम एशिया में स्थायी शांति का मार्ग प्रशस्त करेगी।”
ऊर्जा सुरक्षा और व्यापारिक हितों पर जोर
भारत ने इस बात पर चिंता जताई कि लंबे समय से चल रहे इस तनाव ने न केवल मानवीय संकट पैदा किया है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और व्यापारिक नेटवर्क को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। विशेष रूप से होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में सुरक्षित नौवहन को लेकर भारत ने अपनी प्राथमिकता स्पष्ट की।
व्यापारिक प्रवाह: भारत चाहता है कि वैश्विक व्यापार बिना किसी बाधा के जारी रहे।
ऊर्जा संकट: एक महीने से अधिक समय तक चले इस तनाव के कारण दुनियाभर में ईंधन की कीमतों और आपूर्ति पर गहरा असर पड़ा था, जिससे अब राहत मिलने की उम्मीद है।
ईरान में फंसे भारतीयों के लिए सुरक्षा निर्देश
हालात अभी भी संवेदनशील बने हुए हैं, जिसे देखते हुए तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने नई एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने सुरक्षा कारणों से ईरान में रह रहे भारतीय नागरिकों को तत्काल देश छोड़ने का परामर्श दिया है।
दूतावास द्वारा जारी मुख्य दिशा-निर्देश:
निकासी प्रक्रिया: भारतीय नागरिक दूतावास के अधिकारियों से संपर्क करें और उनके द्वारा सुझाए गए सुरक्षित मार्गों का ही उपयोग करें।
सीमा पार न करें: सख्त हिदायत दी गई है कि कोई भी नागरिक दूतावास के समन्वय के बिना किसी अंतरराष्ट्रीय सीमा की ओर न बढ़े।
संपर्क: किसी भी आपात स्थिति या यात्रा योजना के लिए दूतावास के साथ तालमेल बिठाना अनिवार्य है।
इससे पहले 7 अप्रैल को जारी परामर्श में नागरिकों को सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई थी, लेकिन अब हालात को देखते हुए पूर्ण निकासी पर जोर दिया जा रहा है।
















