सक्ती पावर प्लांट हादसा : बॉयलर फटने से मची तबाही, 13 मजदूरों की गई जान

सक्ती। जिले के डभरा थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले सिंघीतराई स्थित वेदांता लिमिटेड के निजी बिजली संयंत्र में बुधवार दोपहर एक हृदयविदारक दुर्घटना घटी। प्लांट में हुए एक शक्तिशाली विस्फोट और उसके बाद लगी भीषण आग की चपेट में आने से अब तक 13 श्रमिकों की मृत्यु हो चुकी है, जबकि 21 अन्य गंभीर रूप से घायल हैं।
कैसे हुआ हादसा?
पुलिस अधीक्षक प्रफुल्ल ठाकुर के अनुसार, यह घटना दोपहर लगभग 2:30 बजे हुई। पावर प्लांट के बॉयलर से टरबाइन तक उच्च दबाव वाली भाप ले जाने वाली ट्यूब (High-pressure steam pipe) के फटने से यह धमाका हुआ। विस्फोट इतना जोरदार था कि इसकी गूंज दूर तक सुनी गई और मौके पर ही 4 मजदूरों ने दम तोड़ दिया। अन्य 9 श्रमिकों की मृत्यु इलाज के दौरान रायगढ़ और बिलासपुर के अस्पतालों में हुई।
राहत और बचाव कार्य
हादसे के तुरंत बाद स्थानीय प्रशासन, पुलिस और बचाव दल ने मोर्चा संभाला। घायलों को तत्काल नजदीकी चिकित्सा केंद्रों और बेहतर इलाज के लिए पड़ोसी जिलों के अस्पतालों में रेफर किया गया है। वर्तमान में 21 मजदूरों का उपचार जारी है, जिनमें से कुछ की स्थिति अभी भी चिंताजनक बनी हुई है।
सरकार की प्रतिक्रिया और मुआवजा
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इस घटना पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होंने पीड़ित परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए निम्नलिखित घोषणाएं की हैं:
मुआवजा: मृतकों के परिजनों को ₹5 लाख और घायलों को ₹50 हजार की आर्थिक सहायता।
जांच के आदेश: बिलासपुर संभाग के कमिश्नर को घटना की विस्तृत जांच के निर्देश दिए गए हैं। साथ ही जिला प्रशासन ने मजिस्ट्रेट जांच के आदेश भी जारी किए हैं।
कड़ी कार्रवाई: मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया है कि सुरक्षा मानकों में लापरवाही बरतने वालों को बख्शा नहीं जाएगा।
वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस त्रासदी पर दुख जताया है और PMO की ओर से मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख तथा घायलों को ₹50 हजार की अनुग्रह राशि देने का ऐलान किया गया है।
सुरक्षा मानकों पर उठते सवाल
शुरुआती जानकारी के अनुसार, इस हादसे के पीछे सुरक्षा प्रोटोकॉल (SOP) की अनदेखी की आशंका जताई जा रही है। गौरतलब है कि इसी साल जनवरी में बलौदाबाजार की एक फैक्ट्री में भी ऐसा ही विस्फोट हुआ था, जहाँ नियमों के उल्लंघन के कारण मजदूरों को जान गंवानी पड़ी थी। जांच एजेंसियां अब यह पता लगाने में जुटी हैं कि क्या प्लांट में रखरखाव और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन किया जा रहा था या नहीं।
















