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मध्य पूर्व संकट : शांति बहाली के लिए चीन ने पेश किया ‘फोर-पॉइंट प्लान’

नई दिल्ली (एजेंसी)। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने मध्य पूर्व (मिडिल ईस्ट) में अस्थिरता पैदा कर दी है। पाकिस्तान में शांति वार्ता विफल होने के बाद अब इस वैश्विक संकट के बीच चीन की सक्रियता बढ़ गई है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने क्षेत्र में शांति और सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए एक चार-सूत्रीय प्रस्ताव पेश किया है।

जिनपिंग का चार-सूत्रीय शांति रोडमैप

बीजिंग में अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ हुई उच्च स्तरीय बैठक में शी जिनपिंग ने इस योजना का खुलासा किया। उनके प्रस्ताव के मुख्य बिंदु निम्नलिखित हैं:

क्षेत्रीय शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व: विवादों को बातचीत से सुलझाने और पड़ोसी देशों के साथ सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखने पर जोर।

राष्ट्रीय संप्रभुता का सम्मान: किसी भी देश के आंतरिक मामलों में बाहरी हस्तक्षेप का विरोध।

विकास और सुरक्षा में संतुलन: आर्थिक स्थिरता को सुरक्षा के साथ जोड़कर देखना ताकि भविष्य में संघर्ष की गुंजाइश कम हो।

नियम आधारित व्यवस्था: अंतरराष्ट्रीय कानूनों का पालन करना, ताकि दुनिया ‘जंगल राज’ की ओर न लौटे।

अमेरिका और इजरायल पर परोक्ष निशाना

विशेषज्ञों का मानना है कि जिनपिंग का यह रुख सीधे तौर पर अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना है। चीन ने पहले भी इन हमलों को अवैध करार दिया था, लेकिन इस बार उसका लहजा अधिक सख्त है। चीन का मानना है कि वैश्विक व्यवस्था को सैन्य शक्ति के बजाय नियमों से संचालित होना चाहिए।

होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में बढ़ता तनाव

दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण माना जाने वाला होर्मुज जलडमरूमध्य इस समय युद्ध का अखाड़ा बना हुआ है।

ईरान की नाकेबंदी: ईरान ने मार्च से उन जहाजों का रास्ता रोक दिया है जिन्हें वह अपना दुश्मन मानता है।

अमेरिकी जवाबी कार्रवाई: इसके जवाब में अमेरिका ने ईरानी बंदरगाहों की घेराबंदी कर दी है और तेहरान पर कड़े आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए हैं।

तेल संकट: इस टकराव के कारण वैश्विक बाजार में तेल की आपूर्ति बाधित हुई है, जिससे खाड़ी देशों की अर्थव्यवस्था पर भी असर पड़ रहा है।

अमेरिका की चीन को सख्त चेतावनी

इस बीच, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने चीन को लेकर कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि बीजिंग ने ईरान को हथियारों की आपूर्ति जारी रखी, तो चीनी उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक का टैरिफ (आयात शुल्क) लगाया जा सकता है।

तनाव के इस दौर में एक रहस्यमयी घटना भी सामने आई है। अमेरिका द्वारा प्रतिबंधित चीन से जुड़ा एक टैंकर ‘रिच स्टार्री’ होर्मुज क्षेत्र में देखा गया। शुरुआत में इसने अपना रास्ता बदला, लेकिन चीनी चालक दल की पहचान उजागर होने के बाद इसे यात्रा जारी रखने की अनुमति मिल गई।
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मध्य पूर्व का यह संघर्ष अब केवल दो देशों के बीच नहीं रहा, बल्कि यह चीन और अमेरिका जैसी महाशक्तियों के बीच एक बड़े कूटनीतिक और आर्थिक युद्ध का केंद्र बनता जा रहा है। चीन का ‘शांति प्रस्ताव’ इस क्षेत्र में अपनी धाक जमाने की एक सोची-समझी कोशिश मानी जा रही है।

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