उत्तराखंड चारधाम यात्रा का आगाज : आस्था और नए नियमों के बीच दर्शन

देहरादून (एजेंसी)। अक्षय तृतीया के पावन पर्व पर गंगोत्री और यमुनोत्री धाम के कपाट खुलने के साथ ही उत्तराखंड की सुप्रसिद्ध चारधाम यात्रा 2026 का औपचारिक शुभारंभ हो गया है। यात्रा के पहले दिन परंपरा के अनुसार प्रथम पूजा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम से संपन्न की गई। इस वर्ष प्रशासन ने सुरक्षा और व्यवस्था को लेकर कड़े कदम उठाए हैं, जिनमें मंदिर परिसरों में डिजिटल उपकरणों पर पाबंदी और गैर-सनातनियों के लिए विशेष दिशानिर्देश शामिल हैं।
पूजा और शुभारंभ का विवरण
रविवार को धार्मिक रीति-रिवाजों और मंत्रोच्चार के साथ गंगोत्री और यमुनोत्री मंदिरों के द्वार श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए।
गंगोत्री धाम: कपाट दोपहर करीब 12:15 बजे खुले। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी इस अवसर पर उपस्थित रहे और देश की समृद्धि के लिए प्रार्थना की।
यमुनोत्री धाम: यहाँ दोपहर 12:35 बजे कपाट खोले गए।
अन्य धाम: केदारनाथ धाम के द्वार 22 अप्रैल और बदरीनाथ धाम के कपाट 23 अप्रैल को खोले जाने निर्धारित हैं।
प्रवेश के लिए अलग-अलग धामों की नई शर्तें
इस वर्ष तीन धामों में गैर-सनातनियों के प्रवेश को लेकर विशेष नियम बनाए गए हैं, जबकि एक धाम में पूर्ववत व्यवस्था लागू है:
बदरीनाथ और केदारनाथ: यहाँ प्रवेश के लिए गैर-सनातनियों को सनातन धर्म के प्रति अपनी अटूट आस्था का शपथ पत्र (Affidavit) देना अनिवार्य होगा।
गंगोत्री धाम: मंदिर समिति ने निर्णय लिया है कि यहाँ प्रवेश से पूर्व पंचगव्य ग्रहण करना आवश्यक होगा।
यमुनोत्री धाम: यहाँ की समिति ने उदार रुख अपनाते हुए स्पष्ट किया है कि श्रद्धा के साथ आने वाले प्रत्येक श्रद्धालु का स्वागत है, चाहे उनका धर्म या जाति कुछ भी हो।
मुख्य प्रतिबंध और पंजीकरण के आँकड़े
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए व्यवस्थाओं में कुछ बड़े बदलाव किए गए हैं:
डिजिटल बैन: चारों धामों के मुख्य मंदिर परिसरों के भीतर मोबाइल फोन और कैमरे के उपयोग पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है ताकि धार्मिक गरिमा बनी रहे।
रिकॉर्ड पंजीकरण: यात्रा को लेकर भक्तों में भारी उत्साह है। अब तक लगभग 19 लाख श्रद्धालु अपना पंजीकरण (ऑनलाइन और ऑफलाइन) करा चुके हैं।
विशेष नोट: हिमालय की अत्यधिक ठंड और बर्फबारी के कारण ये धाम हर साल सर्दियों (अक्टूबर-नवंबर) में बंद कर दिए जाते हैं और ग्रीष्मकाल की शुरुआत में दोबारा खुलते हैं।











