मध्यप्रदेश का शहरी कायाकल्प : ‘द्वारका नगरी योजना’ से बदलेंगे प्रदेश के शहर

भोपाल (एजेंसी)। मध्यप्रदेश में बढ़ते शहरीकरण और नागरिकों की आधुनिक आवश्यकताओं को देखते हुए राज्य सरकार ने एक महत्वाकांक्षी कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने ‘द्वारका नगरी योजना’ के माध्यम से प्रदेश के शहरों को सुनियोजित और सुविधा-संपन्न बनाने का खाका तैयार किया है। मंत्रालय में आयोजित एक उच्च स्तरीय बैठक के दौरान मुख्यमंत्री ने इस योजना की विस्तृत रूपरेखा और नियमों की समीक्षा की।
योजना का मुख्य विजन और उद्देश्य
मुख्यमंत्री डॉ. यादव के अनुसार, इस योजना का लक्ष्य केवल निर्माण कार्य नहीं, बल्कि शहरी जीवन की गुणवत्ता में सुधार करना है। उन्होंने स्पष्ट किया कि:
नियोजित विकास: शहरों के विस्तार को एक व्यवस्थित और आधुनिक रूप देना।
बुनियादी ढांचा: हर नागरिक को पक्का आवास, बेहतर सड़कें और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर प्रदान करना।
पारदर्शिता: योजना के क्रियान्वयन में समयबद्धता और निर्माण कार्यों की गुणवत्ता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
5000 करोड़ का निवेश और वित्तीय मॉडल
‘द्वारका नगरी योजना’ अगले तीन वर्षों (2026-27 से 2028-29) के लिए तैयार की गई है। इसके लिए कुल 5000 करोड़ रुपये का कोष निर्धारित किया गया है, जिसका ढांचा इस प्रकार है:
मद, विवरण, राशि (करोड़ में)
राज्य अनुदान,शून्य प्रतिशत ब्याज पर ऋण,2201.20
वित्तीय ऋण,संस्थाओं के माध्यम से प्राप्त,2798.80
कुल बजट,त्रि-वर्षीय निवेश,5000.00
पुनर्भुगतान की व्यवस्था: राज्य सरकार द्वारा दिए गए अनुदान को 25 वर्षों के बाद पांच समान किश्तों में लौटाया जाएगा। वहीं, अन्य ऋणों का भुगतान राज्य के मुद्रांक शुल्क (Stamp Duty) से प्राप्त होने वाली आय के माध्यम से 20 वर्षों में किया जाएगा।
विकास की प्राथमिकताएं
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि नगरीय निकायों से प्राप्त प्रस्तावों में निम्नलिखित कार्यों को प्राथमिकता दी जाए:
सड़क एवं स्वच्छता: शहर की मुख्य सड़कों का जीर्णोद्धार और साफ-सफाई की आधुनिक व्यवस्था।
सामाजिक बुनियादी ढांचा: गौशालाओं का निर्माण और व्यवस्थित मुक्तिधामों का विकास।
PPP मॉडल: मास्टर प्लान की सड़कों के निर्माण में ‘पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप’ का उपयोग।
मेट्रोपॉलिटन विकास: बड़े शहरी क्षेत्रों (Metropolitan Regions) की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए कार्ययोजना।
गैप फंडिंग: केंद्र सरकार की ‘अर्बन चैलेंज फंड’ योजना के लिए आवश्यक अतिरिक्त राशि की पूर्ति इसी योजना से की जा सकेगी।
‘द्वारका नगरी योजना’ मध्यप्रदेश के नगरीय प्रशासन के इतिहास में एक मील का पत्थर साबित हो सकती है। आर्थिक सहायता और सुनियोजित नीतियों के मेल से प्रदेश के निकाय न केवल आत्मनिर्भर बनेंगे, बल्कि स्थानीय स्तर पर विकास की गति को भी नई ऊर्जा मिलेगी।
बैठक में मुख्य सचिव श्री अनुराग जैन, अपर मुख्य सचिव श्री संजय दुबे और अन्य वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे, जिन्होंने योजना के तकनीकी पहलुओं पर अपने विचार साझा किए।
















