मध्यप्रदेश

मध्यप्रदेश में खादी बनी समृद्धि का मार्ग : 194 बुनकरों को मिला ₹268 लाख से अधिक का सहयोग

भोपाल (एजेंसी)। मध्यप्रदेश सरकार ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और पारंपरिक शिल्प को आधुनिक पहचान दिलाने के लिए खादी और ग्रामोद्योग को एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में विकसित कर रही है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव और राज्यमंत्री श्री दिलीप जायसवाल ने प्रदेश के बुनकरों के आर्थिक उत्थान और खादी के वैश्विक बढ़ते प्रभाव पर प्रसन्नता व्यक्त की है।

आत्मनिर्भरता की ओर बढ़ते कदम

मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के अनुसार, खादी अब केवल एक कपड़ा मात्र नहीं रह गई है, बल्कि यह “आत्मनिर्भर भारत” और राष्ट्रीय गौरव का प्रतीक बन चुकी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विजन “नए भारत की नई खादी” को आत्मसात करते हुए मध्यप्रदेश खादी एवं ग्रामोद्योग बोर्ड ग्रामीण कारीगरों के जीवन में सकारात्मक बदलाव ला रहा है।

बुनकर मुद्रा योजना की सफलता:

पिछले तीन वित्तीय वर्षों (2023 से 2026) के दौरान, राज्य के 194 बुनकरों को स्वरोजगार के लिए कुल ₹268.50 लाख का ऋण प्रदान किया गया है। इसका वर्षवार विवरण निम्नलिखित है:

2023-24: 44 बुनकरों को ₹21.40 लाख।

2024-25: 147 बुनकरों को ₹231.80 लाख।

2025-26: 3 बुनकरों को ₹15.30 लाख।

बुनकरों के लिए सामाजिक और आर्थिक सुरक्षा

कुटीर एवं ग्रामोद्योग राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) श्री दिलीप जायसवाल ने बताया कि केंद्र सरकार के वस्त्र मंत्रालय द्वारा व्यक्तिगत कारीगरों और स्वयं सहायता समूहों को ₹50,000 से लेकर ₹5 लाख तक की ऋण सुविधा दी जा रही है।

आर्थिक मदद के साथ-साथ बुनकरों की सुरक्षा का भी विशेष ध्यान रखा गया है:

प्रधानमंत्री जीवन बीमा योजना: इसके तहत 616 बुनकरों को जोड़ा गया है, जिसमें ₹436 के वार्षिक प्रीमियम पर ₹2 लाख का जीवन बीमा मिलता है।

प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना: इसमें 840 बुनकर शामिल हैं, जिन्हें मात्र ₹20 वार्षिक शुल्क पर ₹2 लाख का दुर्घटना बीमा कवर दिया जा रहा है।

‘विन्ध्या वैली’ और ‘कबीरा’: गुणवत्ता की नई पहचान

राज्यमंत्री ने रेखांकित किया कि बोर्ड न केवल वस्त्र (सूती, रेशमी, ऊनी) बल्कि मसालों, साबुन और हर्बल उत्पादों के विपणन पर भी जोर दे रहा है। “विन्ध्या वैली” और “कबीरा” ब्रांड्स ने बाजार में अपनी शुद्धता और परंपरा की वजह से एक खास जगह बनाई है। “लोकल टू ग्लोबल” के मंत्र के साथ अब ग्रामीण कारीगर मुख्यधारा की अर्थव्यवस्था का हिस्सा बन रहे हैं।

डिजिटल कनेक्टिविटी और भविष्य की योजनाएं

प्रबंध संचालक श्री माल सिंह भयड़िया ने जानकारी दी कि गांधीजी के ‘ग्राम स्वराज’ के सपने को पूरा करने के लिए मंडल ने नई वेबसाइट (इंटरनेट साइट) लॉन्च की है। यह पोर्टल कारीगरों और खरीदारों के बीच एक सेतु का काम करेगा। साथ ही, प्रशिक्षण कार्यक्रमों और प्रदर्शनियों के माध्यम से प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत को सहेजने का प्रयास निरंतर जारी है।

मुख्य उपलब्धियाँ (पिछले 3 वर्ष):

कुल ऋण वितरण: ₹268.50 लाख (194 लाभार्थी)।

कुल बीमा सुरक्षा: 1,450 से अधिक बुनकर सुरक्षा योजनाओं के तहत कवर।

प्रमुख ब्रांड: विन्ध्या वैली और कबीरा।

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