छत्तीसगढ़

प्रकृति का अनमोल मंत्र : वृक्ष और जल ही हैं जीवन का आधार

रायपुर। विश्व पर्यावरण दिवस के खास मौके पर छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने राज्य की जनता से पर्यावरण और पानी को बचाने के लिए आगे आने का आह्वान किया है। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण में आ रहे बदलावों और भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए हर व्यक्ति को प्रकृति के प्रति जवाबदेह बनना होगा। राज्यपाल के अनुसार, जल और जंगल का रिश्ता बेहद गहरा है; पेड़-पौधे पानी को सहेजते हैं और पानी से ही पेड़ों को जीवन मिलता है।

राज्यपाल ने लोगों से ‘एक पेड़ मां के नाम’ मुहिम का हिस्सा बनने की भावुक अपील की। उन्होंने कहा कि आज हमारे द्वारा लगाया गया एक छोटा सा पौधा आने वाली पीढ़ियों के सुनहरे कल की नींव बनेगा। पेड़ न केवल मौसम के चक्र को ठीक रखते हैं, बल्कि बारिश लाने और जमीन के अंदर पानी का स्तर बढ़ाने में भी मदद करते हैं।

दुनिया भर में तेजी से घटते जल स्तर पर चिंता जताते हुए उन्होंने कहा कि आने वाले समय में पानी की किल्लत एक बड़ा संकट बन सकती है। इससे बचने के लिए हम सभी को मिलकर बारिश के पानी को रोकना होगा, पानी की बर्बादी रोकनी होगी और ज्यादा से अधिक पेड़ लगाने होंगे। जब यह प्रयास एक सामूहिक आंदोलन बनेगा, तभी हम इस संकट से जीत पाएंगे।

नए परिसरों में होगा पौधारोपण

पर्यावरण दिवस को सार्थक बनाने के लिए राज्यपाल श्री रमेन डेका स्वयं लोक भवन और नया रायपुर में बन रहे नए लोक भवन परिसर में पौधे लगाएंगे। उनका मानना है कि पर्यावरण की रक्षा केवल कागजों या सरकारी आयोजनों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि इसमें आम जनता की भागीदारी सबसे जरूरी है।

कर्मचारियों को बांटे गए पौधे

इस मुहिम की शुरुआत करते हुए राज्यपाल ने लोक भवन के स्टाफ को पौधे उपहार में दिए और उन्हें अपने घरों के आसपास हरियाली बढ़ाने के लिए प्रेरित किया। इस अवसर पर सभी कर्मचारियों के लिए मुफ्त में पौधे बांटने का खास इंतजाम भी किया गया, ताकि हर कोई इस नेक काम में अपना योगदान दे सके।

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