नियमितीकरण की मांग को लेकर शिक्षा मंत्री के निवास का घेराव : दुर्ग की सड़कों पर रात बिताने को मजबूर हुए अतिथि शिक्षक

दुर्ग। छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से पहुंचे हज़ारों अतिथि शिक्षकों ने अपनी लंबित मांगों को लेकर आंदोलन तेज़ कर दिया है। सोमवार को प्रदर्शनकारियों ने दुर्ग स्थित स्कूल शिक्षा मंत्री गजेंद्र यादव के बंगले का घेराव करने की कोशिश की। हालांकि, स्थिति को संभालते हुए पुलिस ने रास्ते में ही बैरिकेड्स लगाकर उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस अधिकारियों और प्रदर्शनकारी शिक्षकों के बीच तीखी बहस व धक्का-मुक्की भी देखने को मिली। रास्ता रोके जाने के बाद शिक्षकों ने अपना विरोध जारी रखते हुए सड़क पर ही अपना डेरा जमा लिया और रात वहीं बिताई।
आंदोलन के 20 दिन पूरे, इच्छामृत्यु की कर चुके हैं मांग
प्रदर्शन का आज 20वां दिन है। इससे पहले, अपनी मांगों की ओर सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए अतिथि शिक्षकों ने शिक्षा मंत्री को खून से पत्र भेजकर इच्छामृत्यु तक की गुहार लगाई थी। शिक्षकों का कहना है कि लंबे समय से सेवाएं देने के बावजूद उनका भविष्य अंधकार में है और उन्हें सम्मानपूर्वक जीवन जीने का अधिकार नहीं मिल पा रहा है।
मुख्यमंत्री का बयान
दुर्ग पहुंचे प्रदेश के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने इस मुद्दे पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि विद्यामितान (अतिथि शिक्षकों) के विषय में जो भी नियमसंगत और उचित होगा, सरकार उस पर जल्द ही फैसला लेगी।
क्या हैं अतिथि शिक्षकों की मुख्य मांगें?
वर्षों से सरकारी शिक्षण संस्थानों में अपनी सेवाएं दे रहे अतिथि शिक्षकों का कहना है कि सरकार की ओर से अभी तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। उनकी मुख्य मांगें निम्नलिखित हैं:
नियमितीकरण: सेवा अवधि को देखते हुए स्थायी नियुक्ति की जाए।
समान काम, समान वेतन: अन्य नियमित शिक्षकों के समान ही वेतन दिया जाए।
संविलियन और सेवा सुरक्षा: नौकरी की सुरक्षा के साथ संविलियन का लाभ दिया जाए।
















