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बंगाल की राजनीति में हलचल : सुखेंदु शेखर रॉय ने राज्यसभा और टीएमसी से नाता तोड़ा

पश्चिम बंगाल (एजेंसी)। पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों से तृणमूल कांग्रेस (TMC) के लिए एक बड़ी खबर सामने आ रही है। वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर रॉय ने संसद की सदस्यता के साथ-साथ पार्टी के सभी पदों और प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे दिया है। अपना पद छोड़ते हुए उन्होंने पार्टी आलाकमान पर तीखे हमले किए और हालिया विधानसभा चुनावों में टीएमसी को मिली शिकस्त के लिए बीते डेढ़ दशक के खराब शासन को जिम्मेदार ठहराया।

“जनता ने किया १५ साल के कुशासन का अंत”

सुखेंदु शेखर रॉय ने अपने त्यागपत्र में साफ तौर पर कहा कि पश्चिम बंगाल के मतदाताओं ने पहली बार भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पक्ष में ऐतिहासिक मतदान कर टीएमसी के पिछले 15 वर्षों के कथित अराजक राज को खत्म करने का मन बनाया है। उन्होंने आरोप लगाया कि टीएमसी के कार्यकाल में राज्य में बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार बढ़ा, महिलाओं के खिलाफ अपराधों में इजाफा हुआ और कानून-व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई। इसके अलावा उन्होंने स्वास्थ्य, शिक्षा, औद्योगिक विकास और युवाओं के लिए रोजगार के अवसरों की कमी का मुद्दा भी उठाया।

आरजी कर कांड का किया विशेष उल्लेख

इस्तीफा देने के बाद सुखेंदु शेखर रॉय ने कोलकाता के बहुचर्चित आरजी कर मेडिकल कॉलेज की दर्दनाक घटना और हत्याकांड का जिक्र करते हुए सत्ता पक्ष पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि सत्ता का अहंकार इस कदर बढ़ चुका था कि नेतृत्व को लगता था कि वे कानून से ऊपर हैं और उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। उन्होंने कहा कि वह बंगाल की जनता के इस ऐतिहासिक जनादेश का सम्मान करते हैं और इसी वजह से उन्होंने सक्रिय राजनीति के इस अध्याय को बंद करने का फैसला किया। इसके साथ ही उन्होंने राज्य की नई भाजपा सरकार के विकास कार्यों की सराहना भी की।

भीतर मची रार: ऋतब्रत बनर्जी गुट की बगावत तेज

सुखेंदु शेखर रॉय का यह कदम ऐसे समय पर आया है जब टीएमसी पहले से ही आंतरिक कलह से जूझ रही है। खबरों के मुताबिक, पार्टी से निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक बड़ा धड़ा बगावत की राह पर है। दावा किया जा रहा है कि इस गुट को करीब 58 विधायकों का समर्थन हासिल है। इस धड़े ने सीधे तौर पर अभिषेक बनर्जी की कार्यशैली और सांगठनिक फैसलों पर उंगली उठाई है और चुनाव में पार्टी की करारी हार के लिए उन्हें ही मुख्य रूप से जिम्मेदार ठहराया है।

सियासी मायने: सुखेंदु शेखर रॉय जैसे कद्दावर चेहरे का पार्टी छोड़ना टीएमसी के लिए एक गंभीर झटका है। इस इस्तीफे ने न सिर्फ पार्टी के भीतर की आपसी फूट को उजागर कर दिया है, बल्कि आने वाले दिनों में बंगाल की राजनीति में किसी बड़े फेरबदल और संभावित टूट की अटकलों को भी हवा दे दी है।

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