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नेपाल सीमा पर पकड़ा गया टीएमसी का पूर्व उम्मीदवार : फरार जहांगीर खान पुलिस की गिरफ्त में

पश्चिम बंगाल (एजेंसी)। पश्चिम बंगाल पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) को एक बड़ी कामयाबी हाथ लगी है। राज्य से भागने की फिराक में लगे तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के नेता और फाल्टा विधानसभा उपचुनाव के पूर्व प्रत्याशी जहांगीर खान को नेपाल बॉर्डर के नजदीक से दबोच लिया गया है। पुलिस को उनके गुप्त ठिकाने और भागने की योजना की सटीक जानकारी मिली थी, जिसके आधार पर यह कार्रवाई की गई। गिरफ्तारी के बाद सुरक्षा घेरे में उन्हें कोलकाता लाया जा रहा है।

चुनावी नतीजों के बाद से ही थे अंडरग्राउंड

फाल्टा सीट से टीएमसी के टिकट पर मैदान में उतरे जहांगीर खान उपचुनाव के परिणाम सामने आने के बाद से ही अचानक गायब हो गए थे। पुलिस लगातार उनके संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी, लेकिन वह न तो अपने घर पर मिल रहे थे और न ही राजनीतिक गलियारों में सक्रिय थे।

मैदान छोड़ने के बाद भी ईवीएम में दर्ज था नाम

फाल्टा विधानसभा सीट पर 21 मई को हुए दोबारा मतदान (पुनर्मतदान) से ठीक दो दिन पहले जहांगीर खान ने अचानक चुनाव न लड़ने का ऐलान कर दिया था। उस वक्त उन्होंने दलील दी थी कि वह इलाके के विकास के हित में यह कदम उठा रहे हैं।

हालांकि, नाम वापस लेने की आधिकारिक समय-सीमा बीत जाने के कारण तकनीकी तौर पर मतपत्र और ईवीएम से उनका नाम और पार्टी का सिंबल नहीं हटाया जा सका। 24 मई को जब नतीजे आए, तो भाजपा उम्मीदवार ने 1.09 लाख से अधिक वोटों के विशाल अंतर से जीत हासिल की, जबकि चुनावी दौड़ से हटने वाले जहांगीर खान महज 7,783 वोट पाकर चौथे नंबर पर रहे।

हाई कोर्ट से कवच हटते ही हुई कार्रवाई

जहांगीर खान के खिलाफ साल 2019 से एक आपराधिक मामला चल रहा था, जिसमें उन्हें अदालत से गिरफ्तारी पर अंतरिम रोक (कानूनी सुरक्षा) मिली हुई थी। चुनाव के दौरान भी उन्हें यह राहत जारी रही। लेकिन 26 मई को कलकत्ता हाई कोर्ट ने सख्त रुख अपनाते हुए उनकी सभी कानूनी सुरक्षा हटा दी। कोर्ट का आदेश आते ही पुलिस के लिए कार्रवाई का रास्ता साफ हो गया और उनकी खोज तेज कर दी गई।

विवादों के घेरे में रहा फाल्टा उपचुनाव

फाल्टा क्षेत्र का यह उपचुनाव शुरू से ही सियासी घमासान और विवादों का केंद्र बना रहा। 29 अप्रैल को हुए पहले चरण के मतदान के दौरान कई पोलिंग बूथों पर धांधली के गंभीर आरोप लगे थे। चुनाव आयोग को शिकायतें मिली थीं कि ईवीएम मशीनों पर परफ्यूम छिड़का गया, स्याही फेंकी गई और टेप चिपकाए गए। इन गड़बड़ियों के बाद भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी ने दोबारा चुनाव कराने की मांग की थी, जिसे स्वीकार करते हुए चुनाव आयोग ने पुनर्मतदान का फैसला सुनाया था।

जब खुद को बताया था ‘पुष्पा’

चुनावी प्रचार के दौरान जहांगीर खान अपने एक आक्रामक बयान के कारण काफी सुर्खियों में आए थे। केंद्रीय सुरक्षा बलों और स्थानीय पुलिस की सख्ती पर पलटवार करते हुए उन्होंने फिल्मी अंदाज में कहा था कि अगर पुलिस अफसर खुद को ‘शेर’ समझते हैं, तो वह भी ‘पुष्पा’ हैं और किसी के सामने झुकेंगे नहीं। उनके इस बयान पर विपक्षी दलों ने तीखी आपत्ति जताई थी।

पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और बड़े नेताओं के बेहद करीबी माने जाने वाले जहांगीर खान की इस गिरफ्तारी से पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक बार फिर उबाल आ गया है। पुलिस अब उनसे चुनावी गड़बड़ियों और पुराने मामलों को लेकर कड़ाई से पूछताछ करने की तैयारी में है।

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