एक नए युग का आगाज़ : पीएम मोदी का ऐतिहासिक कार्यकाल और नेतृत्व की नई परिभाषा

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारतीय राजनीतिक इतिहास में 10 जून 2026 का दिन एक अभूतपूर्व मील के पत्थर के रूप में दर्ज हो गया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू के लगातार सबसे लंबे समय तक पद पर रहने के रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया है। इस गौरवशाली उपलब्धि पर देश के पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने ‘भारत की खोज से लेकर भारत पर भरोसे तक’ शीर्षक से लिखे अपने एक विशेष लेख में पीएम मोदी के नेतृत्व की गहराई और देश में आए युगांतकारी बदलावों को रेखांकित किया है।
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी की इस दीर्घकालिक सफलता का सबसे बड़ा रहस्य जनता की आकांक्षाओं पर खरा उतरना और उनके साथ अटूट विश्वास का रिश्ता कायम रखना है। उनके मुताबिक, यह सिर्फ दिनों या सालों की गिनती का रिकॉर्ड नहीं है, बल्कि यह स्वतंत्र भारत के इतिहास का एक ऐसा निर्णायक मोड़ है जिसने देश की दिशा बदल दी है।
वैचारिक और सांस्कृतिक पुनर्जागरण
पूर्व राष्ट्रपति ने अपने लेख में स्पष्ट किया कि 26 मई 2014 के बाद से देश की राजनीति में एक वास्तविक ‘भारतीयता’ का उदय हुआ है। यह वही विचार है जिसका सपना महात्मा गांधी, सरदार वल्लभभाई पटेल, डॉ. बी.आर. अंबेडकर, डॉ. राजेंद्र प्रसाद, सी. राजगोपालाचारी और के.एम. मुंशी जैसे राष्ट्रनिर्माताओं ने देखा था।
“मौजूदा नेतृत्व ने अपनी प्राचीन संस्कृति, गौरवशाली विरासत और समृद्ध परंपराओं पर गर्व करते हुए आधुनिक भारत को एक नई पहचान दी है।”
— रामनाथ कोविंद, पूर्व राष्ट्रपति
आर्थिक विकास का समावेशी मॉडल
आर्थिक मोर्चे पर पीएम मोदी की नीतियों की सराहना करते हुए पूर्व राष्ट्रपति ने कहा कि उन्होंने चक्रवर्ती राजगोपालाचारी (राजाजी) के आर्थिक विचारों को आधुनिक संदर्भ में आगे बढ़ाया है। इस मॉडल की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें तीव्र आर्थिक प्रगति के साथ-साथ समाज के अंतिम पायदान पर खड़े व्यक्ति को भी शामिल किया गया है, जिससे विकास सही मायनों में समावेशी बन सका है।
















