मध्यप्रदेश

उज्जैन भूमि विवाद : कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष ने मुख्यमंत्री मोहन यादव पर लगाए गंभीर आरोप, माँगा इस्तीफा

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश की सियासत में एक बार फिर गर्माहट आ गई है। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने उज्जैन में जमीन से जुड़े मामलों को लेकर सूबे के मुख्यमंत्री मोहन यादव पर तीखे हमले किए हैं। भोपाल में आयोजित एक पत्रकार वार्ता के दौरान पटवारी ने हाल ही में सामने आई एक मीडिया रिपोर्ट का हवाला देते हुए मुख्यमंत्री के परिवार की संपत्तियों पर सवाल उठाए और नैतिक आधार पर उनके इस्तीफे की मांग की।

पारिवारिक संपत्तियों में बढ़ोतरी पर उठाए सवाल

जीतू पटवारी ने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री पद संभालने के बाद मोहन यादव के परिवार और उनके करीबियों की जमीनों का दायरा अप्रत्याशित रूप से बढ़ा है। उन्होंने कहा कि जिस परिवार के पास पहले कथित तौर पर लगभग 100 एकड़ जमीन थी, वह अचानक बढ़कर 335 एकड़ कैसे हो गई?

मीडिया रिपोर्टों के आधार पर कांग्रेस नेता ने दावा किया कि पिछले दो सालों के भीतर उज्जैन और उसके आस-पास के इलाकों में करोड़ों रुपये की लागत से कई नए प्लॉट खरीदे गए हैं।

जमीन के मालिकाना हक का विवरण

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कांग्रेस द्वारा कुछ आंकड़े भी जारी किए गए, जिसमें मुख्यमंत्री और उनके पारिवारिक सदस्यों के नाम दर्ज जमीनों का ब्यौरा दिया गया है:

नीलेश यादव: 108 एकड़

गोविंद यादव: 47 एकड़

नारायण यादव: 19 एकड़

मोहन यादव (स्वयं) व वैभव यादव: 17-17 एकड़

नंदलाल यादव व कलावती: 17-17 एकड़

अभय यादव: 16 एकड़

सीमा यादव: 11 एकड़

शालिनी यादव: 10 एकड़

रेखा यादव: 6 एकड़

रियल एस्टेट कंपनियों और मुनाफे का आरोप

कांग्रेस अध्यक्ष ने सोशल मीडिया और प्रेस वार्ता के जरिए यह भी दावा किया कि इस पूरे मामले में चार रियल एस्टेट कंपनियों की भूमिका है, जिनमें मुख्यमंत्री के परिवार के सदस्यों की बड़ी हिस्सेदारी है। आरोप है कि ये अधिकांश जमीनें उन क्षेत्रों में खरीदी गईं जहाँ सरकारी सड़क परियोजनाओं और लैंड यूज़ (भूमि उपयोग) में बदलाव के कारण जमीनों के दाम तेजी से बढ़े, जिससे सीधे तौर पर आर्थिक लाभ पहुँचा।

न्यायिक जांच और विधानसभा में घेरने की तैयारी

जीतू पटवारी ने इसे एक बड़ा मुद्दा बताते हुए मांग की है कि इस पूरे प्रकरण की सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) के वर्तमान न्यायाधीश से निष्पक्ष न्यायिक जांच कराई जानी चाहिए। उन्होंने साफ किया कि कांग्रेस इस विषय को आगामी विधानसभा सत्र में पूरी प्रमुखता से उठाएगी और सरकार से जवाब मांगेगी।

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