नीट-यूजी 2026 : दंतेवाड़ा की 10 बेटियों ने लहराया सफलता का परचम, ‘छू लो आसमान’ संस्था का मान बढ़ाया

दंतेवाड़ा। दक्षिण बस्तर के सुदूर क्षेत्र दंतेवाड़ा की बेटियों ने एक बार फिर साबित कर दिया है कि अगर सही मार्गदर्शन और अटूट हौसला हो, तो कोई भी मंजिल दूर नहीं। कारली स्थित ‘छू लो आसमान’ कन्या आवासीय कोचिंग सेंटर की 10 छात्राओं ने राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET-UG 2026) में उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए जिले का नाम पूरे प्रदेश में रोशन किया है। इस ऐतिहासिक सफलता के बाद अब इन होनहारों के लिए एमबीबीएस (MBBS), बीडीएस (BDS), आयुर्वेद और पशु चिकित्सा जैसे प्रतिष्ठित पाठ्यक्रमों के दरवाजे खुल गए हैं।
दीपा मरकाम ने मारी बाजी, ये छात्राएं भी रहीं अव्वल
संस्थान की दीपा मरकाम ने 412 अंक हासिल कर केंद्र में शीर्ष स्थान प्राप्त किया। इनके साथ ही अन्य छात्राओं ने भी नीट परीक्षा में अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया:
नेहा नायक: 388 अंक
उर्वशी ठाकुर: 375 अंक
तनिषा दास: 355 अंक
वासनी कोवाशी: 345 अंक
दिव्यांजलि मोड़ियामी: 317 अंक
पारो मरकाम: 312 अंक
प्रार्थना सोरी: 310 अंक
रानू कुंजाम: 308 अंक
रिंकी नाग: 300 अंक
कड़ी मेहनत और अनुशासित माहौल का नतीजा
कोचिंग सेंटर प्रबंधन के अनुसार, यह शानदार परिणाम छात्राओं की निरंतर मेहनत, अध्यापकों के समर्पित मार्गदर्शन, नियमित मॉक टेस्ट और अनुशासित अध्ययन वातावरण की वजह से संभव हो पाया है।
छात्राओं ने अपनी इस सफलता का श्रेय अपने गुरुजनों और जिला प्रशासन की इस विशेष पहल को दिया। डॉक्टरी की पढ़ाई कर समाज सेवा का संकल्प लेते हुए छात्राओं ने दंतेवाड़ा में नए शासकीय मेडिकल कॉलेज के शुरू होने पर बेहद खुशी जताई और वहीं से आगे की पढ़ाई करने की इच्छा जाहिर की।
प्रशासन ने बढ़ाया उत्साह, दी बधाइयां
छात्राओं के इस शानदार प्रदर्शन पर दंतेवाड़ा कलेक्टर श्री देवेश कुमार ध्रुव ने सभी सफल बेटियों को बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की।
इसके अलावा, जिला पंचायत अध्यक्ष श्री नंदलाल मुड़ामी, जिला शिक्षा अधिकारी श्री प्रमोद ठाकुर एवं जिला मिशन समन्वयक श्री हरीश गौतम ने छात्राओं से व्यक्तिगत रूप से मुलाकात कर उनका मुंह मीठा कराया और उनका हौसला बढ़ाया। जिला पंचायत अध्यक्ष ने सफल छात्राओं के घर जाकर उनके परिजनों को बधाई देने की भी बात कही।
एक मिसाल बनी संस्था: ‘छू लो आसमान’ कोचिंग सेंटर ने यह साबित कर दिखाया है कि सही अवसर और संसाधन मिलने पर वनांचल और दूरस्थ क्षेत्रों की बेटियां भी राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में शीर्ष स्थान हासिल कर सकती हैं।
















