छत्तीसगढ़ की खेती में नया दौर : बोरियों का झंझट खत्म, अब नैनो DAP पर किसानों का भरोसा

रायपुर। छत्तीसगढ़ के कृषि क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। राज्य के किसान अब पुरानी तकनीकों को छोड़कर आधुनिक और वैज्ञानिक तरीकों को अपना रहे हैं। इसी कड़ी में मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर (एमसीबी) जिले के केल्हारी गांव के किसान राय सिंह ने इस खरीफ सीजन में पहली बार पारंपरिक खाद की जगह ‘नैनो डीएपी’ (Nano DAP) का इस्तेमाल शुरू किया है।
राय सिंह ने बताया कि पिछले साल उनके गांव के जिन किसानों ने नैनो डीएपी का छिड़काव किया था, उनकी फसलों की वृद्धि काफी अच्छी रही और पैदावार में भी बढ़ोतरी दर्ज की गई। साथियों के इस सफल प्रयोग को देखकर ही उन्होंने इस बार नैनो उर्वरक अपनाने का फैसला किया।
सहकारी समिति से नैनो डीएपी प्राप्त करने के बाद उन्होंने कहा, “समय के साथ खेती के तरीकों को बदलना बहुत जरूरी है। जब कम खर्च में ज्यादा और बेहतर पैदावार मिल सकती है, तो किसानों को नई तकनीक अपनाने में पीछे नहीं रहना चाहिए।”
सहूलियत और बचत का बड़ा साधन
राय सिंह ने इसके व्यावहारिक फायदों का जिक्र करते हुए कहा कि पहले खाद की भारी-भरकम बोरियों को ढोने और लाने-ले जाने में काफी मेहनत और किराया खर्च होता था। अब नैनो डीएपी की एक छोटी सी बोतल को आसानी से थैले में रखकर घर लाया जा सकता है। इससे समय, श्रम और परिवहन खर्च तीनों की बचत हो रही है। उन्होंने अन्य किसानों से भी आधुनिक कृषि पद्धतियों को अपनाने का आग्रह किया।
कृषि विभाग दे रहा मार्गदर्शन
राज्य का कृषि विभाग भी किसानों को संतुलित उर्वरक प्रबंधन और नैनो तकनीकों के सही उपयोग के प्रति जागरूक कर रहा है। समय-समय पर दिए जा रहे प्रशिक्षण और मार्गदर्शन का ही नतीजा है कि प्रदेश के किसान अब वैज्ञानिक खेती की ओर कदम बढ़ाकर अपनी आय बढ़ाने में सफल हो रहे हैं।
















