‘मन की बात’ : पीएम मोदी ने की छत्तीसगढ़ के कोरबा में जारी जल संरक्षण अभियान की सराहना, कहा- ‘कैच द रेन’ ही जल संकट की सटीक कुंजी

रायपुर। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को अपने लोकप्रिय रेडियो कार्यक्रम ‘मन की बात’ के जरिए एक बार फिर देश के गुमनाम नायकों, जमीनी नवाचारों और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में हो रहे बेहतरीन प्रयासों को राष्ट्रीय पटल पर रखा। कार्यक्रम में उन्होंने जल संकट की समस्या का जिक्र करते हुए छत्तीसगढ़ के औद्योगिक शहर कोरबा द्वारा अपनाए गए रेन वॉटर हार्वेस्टिंग मॉडल की जमकर प्रशंसा की।
कंक्रीटीकरण के दौर में कोरबा ने पेश की मिसाल
जहाँ एक ओर तेजी से बढ़ते औद्योगिकीकरण और कंक्रीट के जंगलों के कारण भूजल स्तर लगातार गिर रहा है, वहीं कोरबा जिले ने इस चुनौती से निपटने के लिए एक प्रेरणादायक रास्ता दिखाया है। जिला प्रशासन और नगर निगम कोरबा द्वारा चलाए जा रहे इस अभियान में शहर से लेकर ग्रामीण इलाकों तक बारिश के पानी को सहेजने के लिए व्यापक स्तर पर वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम स्थापित किए जा रहे हैं। पीएम मोदी ने इस प्रयास को आने वाली पीढ़ियों के लिए भविष्य का सुरक्षित समाधान बताया।
‘कैच द रेन’ और ‘मोर गांव-मोर पानी’ का अद्भुत संगम
कोरबा में यह सफलता केंद्र सरकार के ‘कैच द रेन’ और राज्य सरकार की ‘मोर गांव-मोर पानी’ योजना के बीच बेहतर तालमेल के कारण संभव हो सकी है। पीएम मोदी ने बताया कि इस मुहिम के तहत:
भूजल पुनर्भरण (Groundwater Recharge): बारिश के पानी को सीधे जमीन के अंदर पहुँचाने के लिए नए स्ट्रक्चर बनाए जा रहे हैं।
पारंपरिक जल स्रोतों का कायाकल्प: पुराने कुओं, तालाबों और बावड़ियों का जीर्णोद्धार किया जा रहा है।
व्यापक पौधारोपण: पानी रोकने और मिट्टी का क्षरण थामने के लिए बड़े पैमाने पर पेड़ लगाए जा रहे हैं।
जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाने का आह्वान
प्रधानमंत्री ने इस अवसर पर देशवासियों से अपील की कि वे जल संरक्षण को केवल सरकारी जिम्मेदारी न मानकर इसे एक साझा सामाजिक संकल्प बनाएं। उन्होंने आग्रह किया कि हर नागरिक अपने आसपास के कम से कम एक जल स्रोत को गोद ले और उसकी देखरेख करे, ताकि पानी की हर एक बूंद सहेजी जा सके।
















