स्वस्थ दिखने वाले लोगों में भी कार्डिएक चैनलोपैथी का ख़तरा : अध्ययन में बड़ा ख़ुलासा

हेल्थ न्युज (एजेंसी)।
भारतीय शोधकर्ताओं द्वारा 1,029 स्वस्थ व्यक्तियों पर किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि लगभग 1% स्व-घोषित स्वस्थ लोगों में कार्डिएक चैनलोपैथी (Cardiac Channelopathy) के आनुवंशिक वैरिएंट मौजूद हैं। यह स्थिति दिल की इलेक्ट्रो-बायोलॉजिकल गतिविधियों को प्रभावित करती है, जिससे बिना किसी स्पष्ट लक्षण के भी हृदय की धड़कन अनियंत्रित हो सकती है।
- नए जीनोमिक वैरिएंट्स की पहचान
मेडिकल जर्नल ह्यूमन जीनोमिक्स में प्रकाशित इस शोध में CSIR-IGIB के वैज्ञानिकों ने 36 प्रमुख जीन्स का विश्लेषण किया।
जांच के दौरान 1,86,782 वैरिएंट्स का विश्लेषण किया गया, जिनमें से 470 को फ़िल्टर किया गया।
इनमें से 124 नए वैरिएंट्स (लगभग 26%) पहली बार सामने आए हैं, जिनका दुनिया में पहले से कोई डेटा मौजूद नहीं था।
- ख़तरे के प्रमुख कारण
डॉक्टरों के अनुसार दिल से जुड़ी समस्याओं के लिए आमतौर पर निम्नलिखित कारण ज़िम्मेदार होते हैं:
ख़राब जीवनशैली और व्यायाम की कमी
नशा और स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता का अभाव
विशेष टिप्पणी: हालाँकि जीवनशैली बड़े पैमाने पर असर डालती है, यह शोध मुख्य रूप से आनुवंशिक कारणों (Genetic Risk) पर आधारित है, जहाँ व्यक्ति बिना बीमार लगे भी कार्डिएक अरेस्ट के जोखिम में हो सकता है।
- भारत में हृदय रोगों से जुड़ी स्थिति
डब्ल्यूएचओ (WHO) और केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय के आँकड़ों के अनुसार, भारत में पिछले दशक में लाखों लोग दिल की बीमारियों से प्रभावित हुए हैं। 30 से 40 वर्ष के युवाओं में भी हार्ट अटैक के मामले तेज़ी से बढ़े हैं:
2016: 21,914 मौतें
2017: 23,249 मौतें
2018: 25,764 मौतें
2019: 28,005 मौतें
बड़े पैमाने पर रिसर्च की आवश्यकता
अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डॉ. विनोद स्कारिया और डॉ. श्रीधर शिबाशुबु का मानना है कि भारतीय आबादी में व्यापक स्तर पर ऐसी जीनोमिक रिसर्च होनी चाहिए, ताकि समय रहते सही स्वास्थ्य नीतियाँ बनाई जा सकें और संभावित जोखिमों से बचा जा सके।
















