धनबाद के कतरास में बड़ा भू-धंसान : 10 मकान ढहे, अवैध खनन और ब्लास्टिंग से हादसे की आशंका

झारखंड (एजेंसी)। झारखंड के धनबाद स्थित कतरास क्षेत्र के छाताबाद मोहल्ले में शुक्रवार शाम अचानक जमीन धंसने से 10 मकान पूरी तरह ध्वस्त हो गए। धंसान इतना भयानक था कि लगभग 20 फीट गहराई तक जमीन नीचे चली गई, जिसमें चार दोमंजिला इमारतें भी समा गईं।
धमाके के साथ हिली जमीन, बाल-बाल बचे लोग
घटना शाम करीब चार बजे की है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, एक तेज धमाके जैसी आवाज के बाद क्षेत्र में तेज कंपन महसूस हुआ। खतरे को भांपते ही लोग जान बचाकर बाहर की ओर भागे। हादसे के समय मोहम्मद सज्जाद के घर में मौजूद आठ लोग अंदर ही फंस गए थे, जिन्हें काफी मशक्कत के बाद सीढ़ी की मदद से सुरक्षित निकाला गया। वहीं, सो रही हुसैना बानो नामक महिला पर दीवार गिरने से वे गंभीर रूप से घायल हो गईं।
इस घटना से मोहम्मद सज्जाद, मोहम्मद नईम, मोहम्मद रियाज, मोहम्मद मुर्तजा, मोहम्मद कलाम, मोहम्मद इमामुल, सगीर खान, सबुल खान और मोहम्मद हसनैन खान समेत कई परिवारों के आशियाने और सामान पूरी तरह तबाह हो गए हैं।
हादसे के कारण पर दो अलग-अलग दावे
प्रशासन/बीसीसीएल का पक्ष: गोविंदपुर क्षेत्र के जीएम सत्काम आनंद के मुताबिक, शुरुआती जांच में अवैध खनन को मुख्य वजह माना जा रहा है। कोयला माफियाओं ने बीसीसीएल द्वारा छोड़े गए सुरक्षा पिलरों को काट दिया, जिससे जमीन कमजोर होकर धंस गई।
स्थानीय लोगों का आरोप: ग्रामीणों का कहना है कि पास की न्यू आकाशकिनारी कोलियरी में की गई भारी ब्लास्टिंग (हेवी ब्लास्टिंग) की वजह से यह हादसा हुआ है।
राहत-बचाव कार्य जारी, पुनर्वास की चुनौती
घटना के तुरंत बाद पुलिस-प्रशासन, बीसीसीएल की रेस्क्यू टीमें और सीआईएसएफ के जवान मौके पर पहुंचे। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए कतरास, बाघमारा और बरोरा समेत करीब 11 थानों की पुलिस ने इलाके की घेराबंदी की है। स्थानीय जनप्रतिनिधियों की पहल पर प्रभावितों को मुआवजा और पुनर्वास देने का आश्वासन दिया गया है। बीसीसीएल ने पीड़ित परिवारों को सिंदुआरटांड़ स्थित क्वार्टरों में रहने का प्रस्ताव दिया है, हालांकि कई लोग अपना पुराना आशियाना छोड़कर जाने से हिचकिचा रहे हैं।
एक महीने में दूसरी घटना
छाताबाद क्षेत्र में बीते एक महीने के भीतर भू-धंसान का यह दूसरा मामला है। इससे पहले 7 जुलाई को चार नंबर ग्राउंड के पास एक तालाब में बड़ा गोफ (गड्ढा) बन गया था, जिससे पूरा पानी जमीन के अंदर समा गया था और आधा दर्जन मकान क्षतिग्रस्त हुए थे। उस समय प्रशासन ने जोखिम वाले इन 10 मकानों को खाली कराया था, लेकिन कुछ निवासी बाद में वापस लौट आए थे। समय रहते लोगों को सुरक्षित बाहर निकाल लेने से एक बड़ी जनहानि टल गई।
















