भारत सीमा के पास नेपाल में भड़की सांप्रदायिक झड़प, विदेशी नेटवर्क की आशंका के तहत जांच जारी

नई दिल्ली (एजेंसी)। भारत-नेपाल सीमा से सटे नेपाल के सुनसरी जिले में जुलाई के अंत में हुई सांप्रदायिक हिंसा के पीछे सीमा पार नेटवर्क और विदेशी तत्वों की संलिप्तता की आशंका जताई जा रही है। प्रारंभिक खुफिया जानकारियों के आधार पर तैयार की गई रिपोर्ट में नेपाल के गृह मंत्रालय से भारत से लगे संवेदनशील क्षेत्रों में संदिग्ध गतिविधियों और विदेशी धार्मिक गुरुओं की भूमिका की गहन जांच करने का आग्रह किया गया है।
यह विवाद 26 जुलाई की रात सुनसरी के कप्तानगंज क्षेत्र में धार्मिक झंडे फहराने और तेज आवाज में लाउडस्पीकर बजाने को लेकर शुरू हुआ था। देखते ही देखते दोनों पक्षों के बीच तनाव बढ़ गया और झड़पें शुरू हो गईं। बिगड़ते माहौल पर काबू पाने के लिए सुरक्षा बलों को बल प्रयोग करना पड़ा, जिसमें एक व्यक्ति की जान चली गई और कई अन्य घायल हो गए। स्थिति को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को इलाके में कर्फ्यू लगाना पड़ा।
संदिग्ध मौजूदगी और विदेशी फंडिंग पर नजर
खुफिया रिपोर्टों में इस बात का संकेत दिया गया है कि घटना से पहले पाकिस्तान मूल के मौलाना मोहम्मद इलियास घुमान और काठमांडू के एक इमाम मुफ्ती अबु बकर कासमी सहित कुछ विदेशी नागरिक इस क्षेत्र में देखे गए थे। हालांकि, प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि हिंसा में इनकी प्रत्यक्ष भूमिका की पुष्टि जांच के बाद ही हो पाएगी।
इस घटना के बाद भारत से सटे इलाकों में चल रहे धार्मिक स्थलों, मदरसों और उन्हें मिलने वाले विदेशी धन पर भी निगरानी बढ़ा दी गई है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में भी सीमावर्ती इलाकों के जरिए जासूसी और अवैध गतिविधियों के मामले सामने आते रहे हैं, जैसे 2025 में दिल्ली पुलिस ने एक नेपाली नागरिक को गिरफ्तार कर पाकिस्तानी तंत्र को भारतीय सिम कार्ड सप्लाई करने के रैकेट का भंडाफोड़ किया था।
जांच समिति का गठन और सुरक्षा सख्त
31 जुलाई तक के आंकड़ों के अनुसार, इस पूरे उपद्रव में कुल तीन लोगों की जान जा चुकी है और लगभग 25 लोग घायल हुए हैं। नेपाल सरकार ने स्थिति की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति का गठन कर दिया है और पूरे सीमावर्ती क्षेत्र में चौकसी बढ़ा दी गई है। जांच पूरी होने के बाद ही घटना की मुख्य वजह और बाहरी कनेक्शन की वास्तविक स्थिति साफ हो पाएगी।
















