UN सुरक्षा परिषद की रिपोर्ट : दिल्ली लाल किला हमले के तार अल-कायदा से जुड़े

नई दिल्ली (एजेंसी)। नवंबर 2025 में राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक लाल किला क्षेत्र में हुए आत्मघाती आतंकी हमले को लेकर संयुक्त राष्ट्र (UN) की प्रतिबंध समिति ने अपनी नवीनतम रिपोर्ट जारी की है। UN की निगरानी टीम द्वारा अगस्त 2026 में सुरक्षा परिषद के समक्ष प्रस्तुत इस विस्तृत रिपोर्ट में दावा किया गया है कि लाल किला परिसर के समीप हुए धमाके का मुख्य सूत्रधार अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट (AQIS) था।
उल्लेखनीय है कि दिसंबर 2025 से जून 2026 के मध्य संचालित गतिविधियों पर आधारित यह रिपोर्ट इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इससे पूर्व फरवरी में आई एक अन्य रिपोर्ट में इस हमले के पीछे जैश-ए-मोहम्मद का हाथ होने की आशंका जताई गई थी।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की चार्जशीट और मॉड्यूल
भारत में इस केस की गहन जांच कर रही राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) ने मई 2026 में 10 आरोपियों के खिलाफ लगभग 7,500 पृष्ठों का आरोप पत्र दाखिल किया था। NIA की तफ्तीश में स्पष्ट हुआ है कि यह हमला अल-कायदा से संबद्ध ‘अंसार गजवत-उल-हिंद’ (AGuH) के नेटवर्क द्वारा अंजाम दिया गया था। जांच के दौरान आरोपियों के कब्जे से IED, रॉकेट चालित विस्फोटक सामग्री और ड्रोन तकनीक के परीक्षण संबंधी कई सबूत बरामद हुए थे।
माइक्रो-सेल्स और बांग्लादेश नेटवर्क: अल-कायदा का नया पैंतरा
UN रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अल-कायदा अब सीधे बड़े कैडर संचालित करने के बजाय छोटे-छोटे गुप्त गुटों (Micro-cells) के रूप में कार्य कर रहा है, जिससे उन्हें ट्रैक करना कठिन हो गया है। इसके अलावा, संगठन बांग्लादेश में अपने नए ऑपरेशनल बेस स्थापित करने की फिराक में है, जो संपूर्ण दक्षिण एशियाई क्षेत्र और विशेष रूप से भारत की सीमावर्ती सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बन सकता है।
सीमा पार तनाव और एआई (AI) का आपराधिक प्रयोग
रिपोर्ट में पाकिस्तान-अफगानिस्तान सीमा पर बढ़ते सुरक्षा संकट तथा ‘तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान’ (TTP) की आतंकी गतिविधियों का विशेष उल्लेख किया गया है।
इसके अतिरिक्त, सुरक्षा परिषद ने आतंकवाद में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और आधुनिक तकनीक के बढ़ते इस्तेमाल पर गंभीर चिंता जताई है। NIA की जांच में भी यह तथ्य सामने आया था कि मामले के तकनीकी विशेषज्ञ आरोपी जसिर बिलाल वानी ने रॉकेट निर्माण और विस्फोटक सामग्री तैयार करने के लिए यूट्यूब तथा चैटजीपीटी जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स का सहारा लिया था।
प्रतिबंध सूची में संशोधन
अंत में, UN समिति ने अपनी वैश्विक प्रतिबंध सूची में किए गए बदलावों की जानकारी दी। 27 फरवरी 2026 को जारी आदेश के तहत ‘अल-नुसरा फ्रंट फॉर द पीपल ऑफ द लेवांत’ (जिसे ‘हयात तहरीर अल-शाम’ या HTS के नाम से भी जाना जाता है) को संयुक्त राष्ट्र की आधिकारिक प्रतिबंध सूची से बाहर कर दिया गया है।
















