सागर सहित पूरे बुंदेलखंड के विकास को नई गति देने में जुटी सरकार : मुख्यमंत्री डॉ. यादव

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सागर में आयोजित ‘बलराम कृषि महोत्सव’ के दौरान कृषकों से आभासी (वर्चुअल) संवाद करते हुए क्षेत्र के सर्वांगीण विकास और किसानों की आय में वृद्धि के लिए कई महत्वपूर्ण फैसलों की जानकारी दी। वर्ष 2026 को ‘कृषक कल्याण वर्ष’ के रूप में मनाते हुए राज्य सरकार कृषि को अधिक लाभदायक बनाने तथा सहायक व्यवसायों को प्रोत्साहन देने पर केंद्रित है।
कृषि एवं ऋण संबंधी मुख्य सुधार:
ऋण अदायगी नियम में छूट: किसान क्रेडिट कार्ड के तहत 0% ब्याज पर मिलने वाले कर्ज को अब वर्ष में केवल एक बार जमा करने की सुविधा दी गई है। इसके साथ ही 31 मार्च की समय-सीमा से उत्पन्न होने वाली कठिनाइयों को समाप्त करते हुए सरकार ने 800 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है।
बिजली एवं तकनीक: आगामी फसल सीजन में सिंचाई के लिए दिन के समय continuous 10 घंटे बिजली देने की योजना है। साथ ही सोलर पंप वितरण, ड्रोन तकनीक और आधुनिक कृषि यंत्रों के उपयोग पर बल दिया जाएगा।
सुगम खाद वितरण: Urja व उर्वरक केंद्रों पर लंबी कतारों से बचाने के लिए ‘ई-टोकन’ व्यवस्था लागू की जा रही है, जिससे कालाबाजारी पर भी अंकुश लगेगा।
सहायक व्यवसायों से आय बढ़ाने पर जोर:
मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि किसानों को पारंपरिक खेती के अलावा पशुपालन, डेयरी, मत्स्य पालन, कुक्कुट एवं बकरी पालन से जोड़ा जा रहा है। राज्य में दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड (NDDB) के साथ काम किया जा रहा है, ताकि मध्य प्रदेश को देश में शीर्ष स्थान पर लाया जा सके। दुग्ध उत्पादक सांची सहकारिता से जुड़कर वार्षिक बोनस का लाभ ले सकते हैं।
बुंदेलखंड के लिए विकास परियोजनाएं:
केन-बेतवा लिंक प्रोजेक्ट: लगभग 1 लाख करोड़ रुपये की इस योजना से सागर, पन्ना, दमोह, टीकमगढ़ और छतरपुर जिलों के हर खेत तक सिंचाई का पानी पहुंचेगा।
खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing): गेहूं, धान और ज्वार के अलावा नकदी फसलों के प्रसंस्करण के लिए स्थानीय स्तर पर प्रसंस्करण इकाइयां स्थापित की जाएंगी।
स्थानीय बुनियादी ढांचा: सागर में आयुर्वेदिक कॉलेज और नए विश्वविद्यालय की स्थापना के साथ-साथ भूमि अधिग्रहण पर किसानों को चार गुना मुआवजा देने का प्रावधान किया गया है।
कार्यक्रम के दौरान खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री गोविंद सिंह राजपूत और अन्य जनप्रतिनिधियों ने रबी उपार्जन में रिकॉर्ड 104 लाख मीट्रिक टन गेहूं खरीद और बुनियादी ढांचे के विकास का उल्लेख किया।
















