ग्लोबल वार्मिंग और जलवायु परिवर्तन के लिए समृद्ध राष्ट्र ही मुख्य रूप से दोषी : पीयूष गोयल

नई दिल्ली (एजेंसी)। बर्लिन ग्लोबल डायलॉग के दौरान केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने कड़े शब्दों में स्पष्ट किया कि वैश्विक जलवायु संकट के पीछे मुख्य रूप से विकसित राष्ट्रों का ही हाथ है। उन्होंने कहा कि इन देशों में दुनिया की बहुत कम आबादी निवास करती है, इसके बावजूद ऐतिहासिक रूप से सबसे अधिक कार्बन उत्सर्जन इन्हीं के द्वारा किया गया है। मंत्री ने स्पष्ट संदेश देते हुए कहा कि आज पूरा विश्व जिस पर्यावरण संकट से जूझ रहा है, उसका मूल कारण धनी देशों की नीतियां ही हैं।
जलवायु कोष (Climate Finance) की चर्चा करते हुए उन्होंने ध्यान दिलाया कि विकसित देशों द्वारा विकासशील राष्ट्रों को प्रतिवर्ष 100 अरब डॉलर की सहायता देने का संकल्प वर्ष 2009 में लिया गया था। यद्यपि आंकड़ों के अनुसार यह आंकड़ा 2022 में जाकर पूरा हो सका, लेकिन विकासशील देश अभी भी इस वित्तीय मदद की पर्याप्तता, पारदर्शिता और इसे प्रदान करने के तरीकों को लेकर आशंकित हैं।
इसके अतिरिक्त, पीयूष गोयल ने यूरोपीय संघ द्वारा लागू किए गए ‘कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म’ (CBAM) का विरोध करते हुए कहा कि इस तरह के नियमों से आयात पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और व्यापार प्रभावित होता है। उन्होंने इस बात को रेखांकित किया कि भारत 140 करोड़ नागरिकों की प्राथमिकताओं और आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए भी हरित व स्वच्छ ऊर्जा की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है।
अंत में उन्होंने जोर दिया कि वास्तविक और स्थायी समाधान तभी संभव है जब समृद्ध देश ईमानदारी और निष्पक्षता से सहयोग करें, ताकि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को आर्थिक विकास और पर्यावरण संरक्षण में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर न होना पड़े।
















