छत्तीसगढ़

सुशासन की नई मिसाल : ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान से हर घर तक पहुँचेगा सरकारी योजनाओं का लाभ

रायपुर। छत्तीसगढ़ में विकास और जन-कल्याण के क्षेत्र में एक बड़े बदलाव की शुरुआत होने जा रही है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार ने सुशासन की नींव को मजबूत करने और समाज के अंतिम व्यक्ति तक लाभ पहुँचाने के लिए ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान की घोषणा की है। इस विशेष मुहिम का मुख्य उद्देश्य सरकारी योजनाओं की पारदर्शिता को बढ़ाना और हर हकदार परिवार को उसका अधिकार दिलाना है।

जमीनी स्तर पर सुशासन की नई सोच

मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय का मानना है कि किसी भी राज्य का वास्तविक विकास केवल बड़ी इमारतों या सड़कों से नहीं, बल्कि आम नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार से होता है। सरकार का संकल्प है कि जनता को अपने अधिकारों और योजनाओं के लाभ के लिए दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें, बल्कि प्रशासन खुद आगे बढ़कर नागरिकों के दरवाजे तक पहुँचे।

‘नियद नेल्लानार’ मॉडल की सफलता का विस्तार

यह नया अभियान बस्तर क्षेत्र में बेहद सफल रही ‘नियद नेल्लानार’ योजना से प्रेरित है। इस योजना ने दूरदराज के संवेदनशील इलाकों में जनता और प्रशासन के बीच विश्वास का नया रिश्ता कायम किया था। इसकी कामयाबी को देखते हुए पहले इसे 10 जिलों में ‘नियद नेल्लानार 2.0’ के रूप में बढ़ाया गया और अब इसी तर्ज पर राज्य के बाकी 23 जिलों के लिए ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ अभियान तैयार किया गया है।

इन 23 जिलों में लागू होगा अभियान:

यह कार्यक्रम रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और सरगुजा संभाग के निम्नलिखित जिलों के ग्रामीण क्षेत्रों में चलाया जाएगा:

रायपुर संभाग: रायपुर, बलौदाबाजार-भाटापारा, धमतरी, महासमुंद।

बिलासपुर संभाग: बिलासपुर, कोरबा, जांजगीर-चांपा, मुंगेली, रायगढ़, सक्ती, गौरेला-पेण्ड्रा-मरवाही, सारंगढ़-बिलाईगढ़।

दुर्ग संभाग: दुर्ग, बालोद, बेमेतरा, कबीरधाम (कवर्धा), राजनांदगांव।

सरगुजा संभाग: सरगुजा, कोरिया, सूरजपुर, बलरामपुर-रामानुजगंज, जशपुर, मनेंद्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर।

31 प्रमुख कल्याणकारी योजनाओं का सीधा फायदा

इस अभियान के तहत अलग-अलग विभागों की 31 सबसे महत्वपूर्ण योजनाओं को एक साथ जोड़ा गया है, ताकि शत-प्रतिशत पात्र परिवारों को इनका लाभ मिल सके। इनमें मुख्य रूप से शामिल हैं:

आवास एवं रोजगार: प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) और मनरेगा जॉब कार्ड।

खाद्य एवं स्वास्थ्य सुरक्षा: राशन कार्ड, प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना और आयुष्मान भारत कार्ड।

वित्तीय एवं पेंशन लाभ: वृद्धावस्था, विधवा व दिव्यांग पेंशन, किसान सम्मान निधि, महतारी वंदन योजना और जन-धन खाता।

अन्य आवश्यक सेवाएँ: जल जीवन मिशन, सॉइल हेल्थ कार्ड, कौशल विकास, श्रम कार्ड, वनाधिकार पट्टा, आधार कार्ड और विभिन्न जरूरी प्रमाण-पत्र।

डिजिटल डैशबोर्ड से होगी ‘रियल-टाइम’ निगरानी

अभियान को पूरी तरह पारदर्शी और जवाबदेह बनाने के लिए आधुनिक तकनीक का सहारा लिया जा रहा है। छत्तीसगढ़ इन्फोटेक प्रमोशन सोसायटी (CHiPS) द्वारा एक विशेष ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़ डैशबोर्ड’ तैयार किया जाएगा।

इस पोर्टल के जरिए राज्य स्तर से लेकर ग्राम पंचायत और गाँव के स्तर तक हो रही प्रगति की पल-पल की जानकारी (रियल-टाइम डेटा) देखी जा सकेगी। इससे यह साफ रहेगा कि किस योजना में कितने लोग लाभांवित हुए और कितने बाकी हैं, जिससे फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे।

तीन चरणों में जमीनी कार्ययोजना

इस अभियान को पूरी सटीकता से लागू करने के लिए इसे तीन हिस्सों में बांटा गया है:

चरण,कार्ययोजना का स्वरूप

पहला चरण,सर्वेक्षण और डेटा मैपिंग: राशन दुकान (PDS) और विभागीय आंकड़ों के आधार पर संभावित परिवारों की पहचान कर एक डेटाबेस तैयार करना।
दूसरा चरण,”विशेष शिविरों का आयोजन: गाँव, क्लस्टर और ब्लॉक स्तर पर कैंप लगाकर जरूरतमंदों को सीधे योजनाओं से जोड़ना और उनके दस्तावेज तैयार करना।”
तीसरा चरण,”समीक्षा और मूल्यांकन: लगातार मॉनिटरिंग करना कि लाभ सही तरीके से पहुँच रहा है या नहीं, और कमियों को सुधारना।”

प्रशासनिक जिम्मेदारी और बजट प्रबंधन

अभियान को सफल बनाने की कमान जिला स्तर पर कलेक्टरों को सौंपी गई है। संभागायुक्त हर तीन महीने में इसकी प्रगति की जांच करेंगे, जबकि मुख्य सचिव की अगुवाई वाली राज्य स्तरीय कमेटी इसकी अंतिम समीक्षा करेगी।

विशेष बात यह है कि इस अभियान के लिए अलग से कोई नया बजट नहीं बनाया जाएगा। सभी विभाग अपने मौजूदा फंड का ही इस्तेमाल करेंगे। इसके अलावा सीएसआर (CSR), जिला खनिज संस्थान न्यास (DMF) और अन्य संस्थागत माध्यमों से भी संसाधनों का समन्वय किया जाएगा।

निष्कर्ष: मुख्यमंत्री के अनुसार, ‘सुघ्घर छत्तीसगढ़’ सिर्फ एक अभियान नहीं बल्कि जनता के सम्मान और समृद्धि का जरिया है। जब हर पात्र व्यक्ति को उसका हक मिलेगा, तभी एक ‘विकसित छत्तीसगढ़’ का सपना सच हो पाएगा।

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