बालाघाट में विकास का नया दौर : नक्सलमुक्त इलाकों में 330 करोड़ रुपये से बदलेगी 100 गांवों की तस्वीर

भोपाल (एजेंसी)। मध्य प्रदेश के बालाघाट जिले में उग्रवाद के प्रभाव के खात्मे के बाद अब तरक्की और खुशहाली का एक नया दौर शुरू हो गया है। राज्य सरकार की विशेष पहल के तहत इस क्षेत्र के 100 गांवों का कायाकल्प किया जा रहा है, जिससे स्थानीय निवासियों के जीवन स्तर में सुधार की उम्मीद जगी है।
‘मिशन आदि सेवा’ के तहत बड़े पैमाने पर विकास कार्य
सरकार की प्राथमिकता समाज के आखिरी पायदान पर खड़े व्यक्ति तक मूलभूत सुविधाएं और विकास पहुंचाना है। इसी उद्देश्य के साथ ‘मिशन आदि सेवा’ की शुरुआत की गई है। इस महत्वाकांक्षी योजना के अंतर्गत:
वित्तीय आवंटन: इन गांवों के समग्र विकास के लिए लगभग 330 करोड़ रुपये की लागत तय की गई है।
विकास कार्यों की संख्या: इलाके में 800 से अधिक विभिन्न विकास कार्यों को अमलीजामा पहनाया जा रहा है।
प्रमुख क्षेत्र: इन पहलों का मुख्य फोकस शिक्षा, स्वास्थ्य, बुनियादी ढांचे का विस्तार, पोषण स्तर में सुधार और रोजगार के नए अवसर पैदा करना है।
प्रशासन की सक्रियता और धरातल पर काम
जिला प्रशासन के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा लगातार गांवों का दौरा किया जा रहा है और ग्रामीणों से सीधा संवाद स्थापित कर उनकी ज़रूरतों को समझा जा रहा है। इस कार्ययोजना के प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
डिजिटल शिक्षा और बुनियादी सुविधाएं: युवाओं और बच्चों को आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए हर गांव में डिजिटल लाइब्रेरी और सामुदायिक सभा मंच बनाए जा रहे हैं।
पर्यटन और स्थानीय कला को बढ़ावा: क्षेत्र की प्राकृतिक सुंदरता और समृद्ध जनजातीय संस्कृति को उभारने के लिए पर्यटन सर्किट और होम-स्टे विकसित किए जा रहे हैं। इसके साथ ही, बैहर विकासखंड के लगमा गांव में ‘बैगा हाट’ बनाया गया है, जिससे बैगा जनजाति के हस्तशिल्प और पारंपरिक उत्पादों को एक बेहतर बाज़ार मिल सके।
ई-मार्केटिंग और स्वरोजगार: बांस शिल्प, प्राकृतिक शहद, जैविक वस्तुओं और स्वयं सहायता समूहों द्वारा तैयार उत्पादों को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए बड़े बाजारों से जोड़ा जा रहा है।
स्वास्थ्य सेवाएं: दूरदराज के बैगा बहुल गांवों तक स्वास्थ्य सुविधाएं सुनिश्चित करने के लिए ‘बैगा आरोग्य एवं पोषण एक्सप्रेस’ का संचालन किया जाएगा।
पारदर्शिता और निगरानी: सरकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन और युवाओं को जोड़ने के लिए विशेष पोर्टल और एक ऑनलाइन डैशबोर्ड की स्थापना की जा रही है।
इन तमाम बहुआयामी प्रयासों से बालाघाट के नक्सल प्रभावित रहे क्षेत्रों में न केवल सुरक्षा का माहौल मजबूत हुआ है, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए आत्मनिर्भरता और आर्थिक समृद्धि के नए रास्ते भी खुल रहे हैं।
















