बस्तर और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास पर राज्यपाल रमेन डेका का विशेष जोर, डीएमएफ फंड के बेहतर इस्तेमाल के निर्देश

रायपुर। छत्तीसगढ़ के राज्यपाल श्री रमेन डेका ने जिला खनिज न्यास (DMF) के तहत होने वाले विकास कार्यों को लेकर स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि फंड का उपयोग पूरी पारदर्शिता और प्राथमिकता के साथ किया जाना चाहिए। लोक भवन में आयोजित एक उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक में उन्होंने पर्यावरण संरक्षण, शिक्षा, स्वास्थ्य और बुनियादी ढांचे (अधोसंरचना) के विकास को सबसे अहम बताया।
आइए जानते हैं इस बैठक से जुड़ी मुख्य बातें:
पर्यावरण और प्रदूषण नियंत्रण पहली प्राथमिकता: राज्यपाल ने कहा कि सतत विकास के लिए पर्यावरण को बचाना बेहद जरूरी है। इसके लिए डीएमएफ फंड से प्रदूषण नियंत्रण के कड़े कदम उठाए जाएं और उद्योगों को भी पर्यावरणीय नियमों का सख्ती से पालन करने के लिए कहा जाए।
वैज्ञानिक तरीके से हो रेत उत्खनन: नदियों से रेत निकालने के तरीकों पर चिंता जताते हुए उन्होंने वैज्ञानिक और पर्यावरण-अनुकूल उत्खनन पर जोर दिया, ताकि जल स्रोतों और पर्यावरण को कोई नुकसान न पहुंचे।
बस्तर और विस्थापितों के विकास पर फोकस: बैठक में बस्तर क्षेत्र के विकास कार्यों को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए गए। साथ ही, मुख्यधारा में लौटे लोगों और खनन के कारण विस्थापित हुए परिवारों के पुनर्वास और उनकी सामाजिक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने को कहा गया।
विशेष पिछड़ी जनजातियों के लिए स्वास्थ्य शिविर: खनन क्षेत्रों में रहने वाली विशेष पिछड़ी जनजातियों की जीवनशैली और स्वास्थ्य में सुधार के लिए विशेष जागरूकता अभियान चलाने और चिकित्सा शिविर आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
दो साल का स्पष्ट रोडमैप तैयार हो: राज्यपाल ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि डीएमएफ राशि के सुनियोजित उपयोग के लिए कम से कम दो साल का एक प्रभावी रोडमैप तैयार किया जाए, जिसमें आम जनता की जरूरतों और जनप्रतिनिधियों के सुझावों को शामिल किया जाए।
बैठक में खनिज विभाग के सचिव श्री पी. दयानंद ने डीएमएफ पोर्टल 2.0 के माध्यम से चल रही परियोजनाओं की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। इस दौरान राज्यपाल के सचिव डॉ. सी. आर. प्रसन्ना सहित खनन प्रभावित जिलों के तमाम कलेक्टर और खनिज विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
















