उन्नत कृषि : टिश्यू कल्चर सागौन से समृद्ध होंगे छत्तीसगढ़ के किसान

रायपुर। छत्तीसगढ़ सरकार राज्य में पर्यावरण सुधार और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए एक बड़ा कदम उठा रही है। हाल ही में नवा रायपुर के अरण्य भवन में “सागौन प्रबंधन और इसके उन्नत रोपण” को लेकर एक विशेष कार्यशाला का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्री श्री केदार कश्यप शामिल हुए। उनके साथ वन विभाग के आला अधिकारी, वैज्ञानिक और प्रदेशभर से आए प्रगतिशील किसान भी मौजूद रहे।
सागौन: भविष्य का सुरक्षित ‘ग्रीन फिक्स्ड डिपॉजिट’
कार्यशाला के दौरान वन मंत्री श्री केदार कश्यप ने सागौन की खेती को भविष्य का सबसे सुरक्षित निवेश बताया। उन्होंने कहा:
“जिस तरह लोग अपने भविष्य को सुरक्षित करने के लिए बैंकों में पैसा जमा करते हैं, ठीक उसी तरह अपनी जमीन पर सागौन के पौधे लगाना एक बेहतरीन दीर्घकालिक निवेश है।”
अपनी मज़बूती, लंबे समय तक टिकने की क्षमता और दीमक से सुरक्षित रहने के कारण सागौन को लकड़ियों का राजा माना जाता है। वैश्विक बाजार में इसकी मांग और कीमत हमेशा ऊंची रहती है, जिससे किसानों को आने वाले समय में बंपर मुनाफा मिलना तय है।
आधुनिक टिश्यू कल्चर तकनीक से दोगुनी होगी ताकत
पारंपरिक पौधों के मुकाबले वैज्ञानिक तरीके से तैयार टिश्यू कल्चर (Tissue Culture) के पौधे किसानों के लिए गेम-चेंजर साबित हो रहे हैं। मंत्री जी ने इसके फायदे बताते हुए कहा कि:
ये पौधे बहुत तेजी से विकसित होते हैं।
इनका तना बिल्कुल सीधा और गांठ-रहित होता है, जिससे सबसे उत्तम दर्जे की इमारती लकड़ी मिलती है।
कम समय में तैयार होने के कारण यह सीधे तौर पर किसानों की आमदनी को बढ़ाता है।
सागौन के साथ इंटरक्रॉपिंग: शुरुआत से ही कमाई का मौका
किसानों को सागौन के बड़े होने तक लंबा इंतजार नहीं करना पड़ेगा। सरकार ने इसके लिए अंतरवर्ती फसल (Intercropping) यानी दो पौधों के बीच के खाली स्थान का उपयोग करने की सलाह दी है:
शुरुआती वर्ष: किसान सागौन के बीच खाली बची जमीन पर दालें (दलहन) और तेल निकालने वाली फसलें (तिलहन) उगाकर हर साल कमाई कर सकते हैं।
8 से 10 वर्ष बाद: पेड़ों की छंटाई (थिनिंग) प्रक्रिया शुरू होती है, जिससे कटी हुई लकड़ियों को बेचकर बीच की अवधि में भी अच्छा पैसा कमाया जा सकता है।
पौधारोपण के लिए सरकार दे रही है भारी सब्सिडी
निजी जमीनों पर व्यावसायिक रूप से पेड़ लगाने को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकार आर्थिक मदद दे रही है। इसके तहत दो मुख्य श्रेणियों में अनुदान (Grant) दिया जा रहा है:
किसान की श्रेणी,जमीन का दायरा, सरकारी अनुदान,सहायता राशि
छोटे और सीमांत किसान,5 एकड़ तक,100% मुफ्त,₹94.50 प्रति पौधा
बड़े किसान और संस्थाएं,5 एकड़ से अधिक,50% वित्तीय सहायता,-
विशेषज्ञों की सलाह: छत्तीसगढ़ की मिट्टी सोना उगलने के लिए तैयार
इस कार्यशाला में कोयम्बटूर से आईं देश की जानी-मानी वैज्ञानिक डॉ. रेखा आर. वारियर और डॉ. आर. यशोदा ने शिरकत की। उन्होंने किसानों को मिट्टी की जांच, सही पौधों का चुनाव और बीमारियों से बचाव के वैज्ञानिक तरीके सिखाए।
वैज्ञानिकों के अनुसार, छत्तीसगढ़ की आबोहवा सागौन के लिए सबसे मुफीद है। विशेष रूप से बीजापुर, भोपालपटनम, कोटा, अंबागढ़ चौकी, रायगढ़, सराईपाली और नारायणपुर जैसे इलाकों में सागौन आधारित कृषि-वानिकी (Agroforestry) ग्रामीण अर्थव्यवस्था की तस्वीर बदल सकती है।
वन मंत्री का संदेश: कार्यक्रम के अंत में वन मंत्री ने “खेत में सागौन, हर किसान समृद्ध” का नारा देते हुए सभी किसानों से अपील की कि वे इस तकनीक को अपनाएं और छत्तीसगढ़ को हरित विकास की नई ऊंचाइयों पर ले जाएं।
















