छत्तीसगढ़ का सामाजिक विकास मॉडल : हर वर्ग के समावेशी उत्थान की नई मिसाल

रायपुर। एक कल्याणकारी राज्य की सही पहचान इसी बात से होती है कि विकास की दौड़ में अंतिम पंक्ति का व्यक्ति भी पीछे न छूटे। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय और समाज कल्याण मंत्री लक्ष्मी राजवाड़े के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार ने इसी नीति को अपनाते हुए पिछले ढाई वर्षों (दिसंबर 2023 से जून 2026) में सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण का नया खाका तैयार किया है। दिव्यांगों, बुजुर्गों, विधवा व परित्यक्त महिलाओं तथा ट्रांसजेंडर समुदाय के लिए लागू की गई योजनाओं ने राज्य में आत्मनिर्भरता का आधार मजबूत किया है।
पेंशन व्यवस्था में पारदर्शिता और डिजिटलीकरण
राज्य में पेंशन योजनाएं लाखों जरूरतमंद परिवारों के लिए मुख्य आर्थिक सहारा बनी हैं। अकेले ‘मुख्यमंत्री पेंशन योजना’ के लाभार्थियों की संख्या बढ़कर 7.56 लाख पहुँच गई है, जबकि विभिन्न पेंशन मदों के तहत कुल 21.73 लाख से अधिक नागरिक हर महीने सीधी वित्तीय मदद पा रहे हैं। इस पूरी व्यवस्था को आधुनिक बनाने के लिए लगभग 96 प्रतिशत भुगतानों को डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के माध्यम से सीधे खातों में भेजा जा रहा है। ई-केवाईसी और आधार सीडिंग के जरिए पारदर्शिता सुनिश्चित कर केवल पात्र लोगों तक लाभ पहुँचाया जा रहा है।
दिव्यांगजनों का अधिकार आधारित सशक्तिकरण
राज्य सरकार ने दिव्यांग कल्याण को दया का विषय न मानकर अधिकार और अवसर के रूप में स्थापित किया है:
UDID कार्ड: राज्य में विशिष्ट पहचान पत्र धारकों की संख्या 2.77 लाख हो गई है।
सहायक उपकरण वितरण: कृत्रिम अंग और सहायक साधन पाने वाले हितग्राहियों का आंकड़ा 1,161 से छलांग लगाकर 17,038 तक पहुँच गया है।
शिक्षा को बढ़ावा: दिव्यांग विद्यार्थियों के लिए राज्य छात्रवृत्ति लेने वालों की संख्या दोगुनी होकर 14 हजार से अधिक हुई है।
संस्थागत ढांचा: ‘सुगम्य छत्तीसगढ़ अभियान’ के तहत सरकारी इमारतों व परिसरों को दिव्यांगों के अनुकूल बनाया जा रहा है। साथ ही अधिकारों की सुरक्षा के लिए ‘राज्य आयुक्त’ के नए पद का सृजन भी किया गया है।
वरिष्ठ नागरिकों की सुरक्षा और नशामुक्ति की पहल
बढ़ती बुजुर्ग आबादी को ध्यान में रखते हुए देखरेख केंद्रों और वृद्धाश्रमों की क्षमता बढ़ाई गई है। बुजुर्गों की मदद के लिए संचालित ‘सियान हेल्पलाइन (155326)’ पर दर्ज कॉल की संख्या 1.14 लाख से बढ़कर 2.87 लाख हो गई है, जो इस व्यवस्था पर नागरिकों के बढ़ते भरोसे का प्रतीक है।
दूसरी ओर, नशामुक्त समाज के निर्माण हेतु ‘भारत माता वाहिनी योजना’ के तहत नशामुक्ति केंद्रों की संख्या 11 से बढ़ाकर 29 कर दी गई है। इन केंद्रों के माध्यम से 5,220 से अधिक व्यक्तियों का परामर्श, इलाज और सामाजिक पुनर्वास किया जा चुका है।
संस्थागत ढांचा और बजट में बढ़ोतरी
कल्याणकारी योजनाओं को सुचारू रूप से चलाने के लिए आधारभूत संरचना का तेजी से विस्तार किया जा रहा है। माना कैंप (रायपुर) में विशेष विद्यालय भवन का निर्माण, श्रवण व दृष्टि बाधित विद्यालयों का अपग्रेडेशन और दिव्यांगजन वित्त विकास निगम के जरिए कम ब्याज पर ऋण की सुविधाएं दी जा रही हैं।
सामाजिक कल्याण के प्रति सरकार की प्राथमिकता का अंदाज़ इसी बात से लगाया जा सकता है कि विभाग का बजट वित्तीय वर्ष 2023-24 के 1,512 करोड़ रुपये से बढ़ाकर वर्ष 2025-26 में 1,600 करोड़ रुपये प्रस्तावित किया गया है।
पारदर्शी तकनीक और मानवीय दृष्टि का मेल
छत्तीसगढ़ का यह मॉडल दिखाता है कि जब प्रशासनिक तकनीक (जैसे DBT, डिजिटलीकरण व हेल्पलाइन) में मानवीय संवेदनशीलता का जोड़ होता है, तो नीतियां केवल कागजों पर नहीं रहतीं बल्कि धरातल पर बदलाव लाती हैं। यह मॉडल राज्य के नागरिकों को सम्मानपूर्वक जीने का अधिकार देकर एक समावेशी समाज के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
















