सीएम साय ने जाँची ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन 1076’ की तैयारी, कॉल पर सीधे जनता से की बात

रायपुर। छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने हाल ही में राज्य की ‘मुख्यमंत्री हेल्पलाइन और शिकायत प्रबंधन प्रणाली 1076’ का बारीकी से निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने हेल्पलाइन की तकनीकी व्यवस्थाओं, काम करने के तरीके और आम जनता की शिकायतों को दूर करने वाले सिस्टम को समझा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को कड़े निर्देश दिए कि नागरिकों को मिलने वाली सरकारी सेवाएं बेहतर हों और लोगों की समस्याओं का समाधान एक तय समय सीमा के भीतर किया जाए।
इस अहम मौके पर मुख्यमंत्री के साथ कैबिनेट मंत्री रामविचार नेताम, दयाल दास बघेल, टंकराम वर्मा, और गुरु खुशवंत साहेब समेत शासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद थे। सभी ने मिलकर जनता को दी जाने वाली सेवाओं और शिकायत दर्ज करने की पूरी व्यवस्था का जायजा लिया।
त्वरित समाधान और पारदर्शिता पर रहेगा जोर
हेल्पलाइन सेंटर का दौरा करते हुए सीएम साय ने खुद देखा कि शिकायतें कैसे दर्ज होती हैं, उनकी मॉनिटरिंग कैसे की जाती है और उन्हें कैसे सुलझाया जाता है। उन्होंने अधिकारियों से बातचीत में साफ कहा कि व्यवस्था में पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही होनी चाहिए। मुख्यमंत्री ने दोहराया कि राज्य सरकार की सबसे बड़ी प्राथमिकता हर नागरिक की समस्या का तेजी से और सही समाधान करना है।
जब मुख्यमंत्री ने खुद उठाया फोन
सेंटर की शुरुआत के दौरान एक बेहद दिलचस्प वाकया भी सामने आया, जब मुख्यमंत्री ने खुद हेल्पलाइन पर आने वाले एक कॉल पर बात की। रायपुर के रहने वाले कॉलर पूनाराम ठाकरे ने जब फोन किया, तो दूसरी तरफ खुद मुख्यमंत्री थे। सीएम साय ने उनसे उनका नाम, पता और परेशानी पूछी। पूनाराम ने बताया कि उन्होंने आय प्रमाण पत्र के लिए आवेदन किया था, जिसमें आ रही दिक्कत को लेकर वे अपनी शिकायत दर्ज कराना चाहते थे। मुख्यमंत्री ने उन्हें भरोसा दिलाया कि उनकी इस समस्या का समाधान बहुत जल्द कर दिया जाएगा।
इसके साथ ही मुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों ने लाइन पर जुड़े कुछ और हितग्राहियों से भी सीधी बातचीत की और उनकी शिकायतें सुनीं। लोगों ने अपनी बात सीधे सरकार तक पहुँचाने के इस नए माध्यम की काफी तारीफ की।
कैसे काम करता है यह पूरा सिस्टम?
यह हेल्पलाइन सिस्टम राज्य के सभी सरकारी विभागों को एक साथ एक मंच पर जोड़ता है। इसमें:
1,200 से अधिक अलग-अलग श्रेणियों में शिकायतें दर्ज कराई जा सकती हैं।
लगभग 8,000 अधिकारियों को ब्लॉक स्तर से लेकर राज्य स्तर तक (चार अलग-अलग प्रशासनिक स्तरों पर) जिम्मेदारी सौंपी गई है।
यदि निचले स्तर पर तय समय में समाधान नहीं होता, तो शिकायत खुद-ब-खुद उच्च अधिकारियों के पास पहुँच जाती है (मल्टी-लेवल एस्केलेशन)।
स्थानीय युवाओं को मिला रोजगार
मुख्यमंत्री ने सेंटर में काम कर रहे युवाओं से भी मुलाकात की और उनके अनुभव जाने। अधिकारियों ने बताया कि इस पूरी व्यवस्था को चलाने के लिए स्थानीय युवाओं को काम पर रखा गया है। इससे न सिर्फ लोगों को बेहतर सर्विस मिल रही है, बल्कि राज्य के युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा हुए हैं।
निरीक्षण के आखिरी हिस्से में अधिकारियों ने मुख्यमंत्री को डिजिटल डैशबोर्ड और शिकायत विश्लेषण (Complaint Analysis) सिस्टम की जानकारी दी। मुख्यमंत्री ने निर्देश दिए कि इन आंकड़ों का गहराई से अध्ययन किया जाए ताकि यह समझा जा सके कि किस विभाग में क्या कमियां हैं और उन्हें पूरी तरह सुधारा जा सके। मुख्यमंत्री ने अंत में कहा कि यह हेल्पलाइन सिर्फ शिकायतें दूर करने का जरिया नहीं है, बल्कि सरकार और जनता के बीच के भरोसे को और मजबूत करने का एक बड़ा माध्यम है।
















