क्लेम रोकने पर उपभोक्ता फोरम सख्त, स्टार हेल्थ इंश्योरेंस पर लगा ₹9.85 लाख का जुर्माना

जांजगीर-चांपा। हेल्थ इंश्योरेंस पॉलिसी होने के बावजूद इलाज का पूरा खर्च देने से मुकरने वाली बीमा कंपनी ‘स्टार हेल्थ एंड एलाइड इंश्योरेंस’ को जिला उपभोक्ता फोरम ने तगड़ा झटका दिया है। जांजगीर-चांपा के जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने कंपनी की इस हरकत को ‘सेवा में कमी’ माना है। अब फोरम के आदेश के बाद बीमा कंपनी को पीड़ित ग्राहक को करीब 9.85 लाख रुपये (₹9,60,699 क्लेम राशि, ₹20,000 मानसिक परेशानी का मुआवजा और ₹5,000 अदालती खर्च) का भुगतान करना होगा।
क्या है पूरा मामला?
चांपा के अग्रसेन चौक पर रहने वाले 55 वर्षीय संजय कुमार अग्रवाल ने मार्च 2021 में स्टार हेल्थ इंश्योरेंस से एक पॉलिसी ली थी। लगातार चार सालों तक समय पर प्रीमियम भरकर उन्होंने इसका नवीनीकरण (रिन्यूअल) कराया, जिससे उन्हें बोनस का लाभ भी मिला। उनकी यह पॉलिसी 31 मार्च 2025 से 30 मार्च 2026 तक के लिए वैध थी।
इसी दौरान बीमार होने पर संजय कुमार को मुंबई के प्रसिद्ध कोकिलाबेन धीरूभाई अंबानी अस्पताल में दो बार भर्ती होना पड़ा:
पहली बार: 31 मार्च से 14 अप्रैल 2025 तक (इलाज का खर्च: ₹16,32,991)
दूसरी बार: 29 अप्रैल से 6 मई 2025 तक (इलाज का खर्च: ₹3,27,709)
बीमा कंपनी ने क्यों रोका पैसा?
जब उपभोक्ता ने कुल खर्च के लिए बीमा कंपनी के पास क्लेम फाइल किया, तो कंपनी ने पहली बार के बिल में से केवल 10 लाख रुपये का भुगतान किया। वहीं, दूसरी बार के पूरे खर्च को यह कहकर खारिज कर दिया कि उनके बीमा की तय राशि (सम एश्योर्ड) खत्म हो चुकी है। परेशान होकर संजय कुमार ने अपने हक के लिए जिला उपभोक्ता फोरम का दरवाजा खटखटाया और बचे हुए ₹9,60,699 की मांग की।
उपभोक्ता आयोग का फैसला
मामले की सुनवाई करते हुए जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य विशाल तिवारी व श्रीमती महिमा सिंह की पीठ ने दोनों पक्षों के सबूतों और दलीलों को परखा। आयोग ने पाया कि शिकायतकर्ता की कुल बीमा राशि ₹20 लाख की थी, और उनके इलाज का कुल खर्च इस सीमा के भीतर ही था। इसके बावजूद कंपनी ने बिना किसी ठोस वजह के भुगतान रोक दिया, जो कि अनुचित व्यापारिक व्यवहार की श्रेणी में आता है।
45 दिनों में करना होगा भुगतान
उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम 2019 की धारा 35 के तहत शिकायत को सही पाते हुए फोरम ने आदेश दिया कि बीमा कंपनी को फैसले की तारीख से 45 दिनों के भीतर:
बकाया क्लेम राशि: ₹9,60,699
मानसिक क्षतिपूर्ति: ₹20,000
मुकदमा खर्च: ₹5,000
ध्यान दें: यदि बीमा कंपनी तय किए गए 45 दिनों के भीतर इस राशि का भुगतान नहीं करती है, तो उसे इस पूरी रकम पर 7% सालाना की दर से ब्याज भी देना होगा।
















