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‘रामायण’ फिल्म का संवाद : क्या ग्रंथों में श्रीराम के रावण-वध के क्रोधित प्रण का उल्लेख है?

मुंबई (एजेंसी)। नितेश तिवारी के निर्देशन और नमित मल्होत्रा के निर्माण में बन रही बहुप्रतीक्षित फिल्म ‘रामायण’ का ट्रेलर सामने आते ही दर्शकों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बन गया है। रणबीर कपूर, जो इसमें श्रीराम की भूमिका निभा रहे हैं, के एक संवाद ने विशेष रूप से ध्यान खींचा है। दृश्य में श्रीराम अत्यंत क्रोध में धनुष उठाकर पूरी दुनिया के सामने रावण का वध करने की प्रतिज्ञा लेते दिखते हैं। इस दृश्य के बाद यह सवाल उठने लगा है कि क्या वास्तव में पौराणिक संदर्भों में श्रीराम द्वारा इस तरह क्रोधित होकर प्रतिज्ञा लेने का कोई विवरण मिलता है?

सौम्य और शांत स्वभाव के प्रतीक श्रीराम

शास्त्रों और ग्रंथों (जैसे वाल्मीकि रामायण और रामचरितमानस) में श्रीराम को अत्यंत धैर्यवान, दयालु और शांत स्वरूप में चित्रित किया गया है। महापराक्रमी होने के बावजूद वे सदैव विनम्र रहे और राक्षसों का संहार करते समय भी कभी अनावश्यक क्रोध या अहंकार का प्रदर्शन नहीं किया।

ताड़का वध का प्रसंग: जब ताड़का ने विश्वामित्र के यज्ञ में बाधा डालने के लिए आक्रमण किया, तब भी श्रीराम ने क्रोधित होकर धनुष नहीं उठाया। संत तुलसीदास के अनुसार, गुरु की आज्ञा पाकर श्रीराम ने एक ही बाण से उसका अंत कर दिया और मृत्यु से पूर्व उसे सद्गति प्रदान की।

क्रोध नहीं, करुणा से भरी थी प्रतिज्ञा

अरण्य कांड के दौरान जब श्रीराम ने वनों में मुनियों की अस्थियों के ढेर देखे, तो उनका हृदय करुणा से भर उठा। उन्होंने ऋषियों को निर्भय करने के लिए पृथ्वी को राक्षसों से मुक्त करने का संकल्प लिया था, परंतु इस संकल्प में भी क्रोध या व्यक्तिगत शत्रुता का भाव नहीं था।

इसी प्रकार, युद्ध कांड में जब रावण का भाई विभीषण श्रीराम की शरण में आया, तो श्रीराम ने स्पष्ट रूप से कहा था कि उनकी शरण में आने वाले किसी भी प्राणी को अभयदान देना उनका परम व्रत है—चाहे वह स्वयं रावण ही क्यों न हो।

सुग्रीव का आक्रोश और मर्यादा का पाठ

ग्रंथों के अनुसार, रावण के प्रति उग्रता और तीव्र आक्रोश श्रीराम के बजाय सुग्रीव के चरित्र में दिखाई देता है। जब सुग्रीव ने पहली बार रावण को देखा तो वे अपना आपा खोकर उस पर टूट पड़े थे। तब श्रीराम ने उन्हें ऐसा न करने की सीख दी थी और युद्ध के नियमों तथा मर्यादा का पालन करने का स्मरण कराया था।

प्रचलित रामकथाओं और प्रामाणिक ग्रंथों का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट होता है कि फिल्म के ट्रेलर में दिखाया गया क्रोधित प्रण पारंपरिक विवरणों से मेल नहीं खाता। चूँकि रामायण के विभिन्न क्षेत्रीय संस्करण और मौखिक परंपराएँ भी अस्तित्व में हैं, इसलिए यह संभव है कि फिल्म निर्माताओं ने कथा को सिनेमाई रूप देने के लिए रचनात्मक छूट (Creative Liberty) ली हो।

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