आपातकालीन स्थिति में संजीवनी है CPR : दिल का दौरा पड़ने पर ऐसे बचाएं अपनों की जान

हेल्थ न्युज (एजेंसी)। आज के समय में दिल की बीमारियां और हार्ट अटैक केवल बुजुर्गों तक सीमित नहीं रह गए हैं। हाल के दिनों में 40 वर्ष से कम उम्र के युवाओं में भी दिल के दौरे के मामले तेजी से बढ़े हैं। चौंकाने वाली बात यह है कि जो लोग नियमित रूप से जिम जाते हैं और अपनी फिटनेस का पूरा ध्यान रखते हैं, वे भी इसका शिकार हो रहे हैं। डॉक्टरों और वैज्ञानिकों के अनुसार, कोविड-19 महामारी के बाद से लोगों के दिल पर गहरा असर पड़ा है, जो इस समस्या के बढ़ने की एक बड़ी वजह हो सकता है। ऐसे में हर उम्र के व्यक्ति को सतर्क रहने की सख्त जरूरत है।
विशेषज्ञों का मानना है कि दिल की बीमारियों से बचने के उपायों के साथ-साथ, हमें यह भी पता होना चाहिए कि आपातकालीन स्थिति (Emergency) में तुरंत क्या कदम उठाएं। ऐसे वक्त में CPR (सीपीआर) जैसी तकनीक किसी मरते हुए इंसान के लिए वरदान साबित हो सकती है।
क्या है CPR और यह क्यों जरूरी है?
कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) एक ऐसी इमरजेंसी मेडिकल तकनीक है, जिससे दिल का दौरा पड़ने या सांस रुकने की स्थिति में मरीज की जान बचाई जा सकती है।
जब किसी को हार्ट अटैक आता है, तो उसका दिल धड़कना बंद कर देता है, जिससे शरीर और दिमाग में ऑक्सीजन तथा खून की सप्लाई रुक जाती है। सही समय पर दिया गया CPR मरीज के शरीर में कृत्रिम (artificial) तरीके से ब्लड सर्कुलेशन और ऑक्सीजन के प्रवाह को बनाए रखता है, जिससे शरीर के दूसरे अंग (Multi-organs) खराब होने से बच जाते हैं।
CPR देने का सही तरीका (Step-by-Step Guide)
डॉक्टरों के अनुसार, CPR देने की एक खास और सटीक तकनीक होती है, जिसे सही तरीके से अपनाना बेहद जरूरी है:
मरीज की स्थिति: सबसे पहले मरीज को किसी सख्त और समतल जगह पर पीठ के बल सीधा लेटाएं।
हाथों की पोजीशन: अपने एक हाथ की हथेली को मरीज की छाती के बीचों-बीच (दोनों निप्पल्स के बीच) रखें। अब दूसरे हाथ की उंगलियों को पहले हाथ की उंगलियों में फंसा लें (लॉक कर लें)।
दबाव (Compression): अपनी कोहनियों को सीधा रखते हुए, अपने शरीर के वजन के साथ मरीज की छाती को नीचे की तरफ दबाएं।
गति (Speed): छाती को कम से कम 5 सेंटीमीटर (2 इंच) तक दबाना चाहिए। ध्यान रहे कि आपको 1 मिनट में 100 से 120 बार दबाने की रफ्तार (रैपिड स्पीड) बनाए रखनी है।
साइकिल: हर 30 बार छाती दबाने के बाद, मरीज को दो बार मुंह से सांस (माउथ-टू-माउथ रेस्पिरेशन) दी जा सकती है, यदि आप इसमें प्रशिक्षित हैं।
विशेषज्ञों की महत्वपूर्ण सलाह
हृदय रोग विशेषज्ञों (Cardiologists) का कहना है कि CPR केवल एक अस्थायी शुरुआती मदद है। जैसे ही आप मरीज को CPR देना शुरू करें, तुरंत एम्बुलेंस को कॉल करें या मरीज को नजदीकी अस्पताल ले जाने की व्यवस्था करें।
इसके अलावा, भविष्य में दिल के दौरे से बचने के लिए अपने कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और तनाव को नियंत्रित रखें। यदि संभव हो, तो किसी नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र से CPR की प्रैक्टिकल ट्रेनिंग जरूर लें, क्योंकि आपका थोड़ा सा ज्ञान किसी की जिंदगी बचा सकता है।
नोट: इस लेख में दी गई जानकारी सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से है। किसी भी आपातकालीन स्थिति में तुरंत डॉक्टर या मेडिकल टीम से संपर्क करें।
















