वैश्विक भू-राजनीतिक उथल-पुथल का घरेलू बाजार पर प्रहार : ईंधन और बुनियादी खाद्य वस्तुओं की दरें चढ़ीं

नई दिल्ली (एजेंसी)। पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य और राजनीतिक तनाव का सीधा असर भारतीय अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ता की जेब पर दिखाई देने लगा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के उछाल के साथ-साथ गेहूं और प्याज जैसी आवश्यक खाद्य वस्तुओं के दाम तेजी से बढ़े हैं।
कच्चे तेल में उछाल और ईंधन दरों की स्थिति
अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक समझौतों की गुंजाइश कम होने तथा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में अनिश्चितता के कारण ऊर्जा बाजार में भारी उतार-चढ़ाव जारी है:
अंतरराष्ट्रीय भाव: ब्रेंट क्रूड $92 प्रति बैरल के पास पहुंच गया है, जबकि WTI क्रूड $85 प्रति बैरल को पार कर चुका है। इसके $100 तक पहुंचने की आशंका है।
घरेलू प्रभाव: भारत अपनी जरूरत का लगभग 85% कच्चा तेल आयात करता है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर तेजी के कारण देश में पेट्रोल और डीजल सस्ता होने की संभावनाएं समाप्त हो गई हैं, जिससे परिवहन और माल ढुलाई की लागत बढ़ने का खतरा है।
खाद्य सुरक्षा और रसोई का बिगड़ता बजट
ईंधन संकट के अलावा, वैश्विक और स्थानीय कारणों से खान-पान की चीजें भी महंगी हो रही हैं:
गेहूं और आटा: रूस-यूक्रेन संघर्ष के कारण काला सागर (Black Sea) क्षेत्र से आपूर्ति बाधित हुई है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं $6.7 प्रति बुशेल के स्तर पर है। भारतीय मंडियों में बीते एक महीने में गेहूं के दामों में 4% तक की बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जिससे आटा और ब्रेड जैसी सामग्री महंगी होने की पूरी आशंका है।
प्याज की कीमतें: खरीफ फसल की आवक में विलंब होने से प्याज की कीमतों पर दबाव बना हुआ है:
वर्तमान खुदरा दर: ₹37.20 प्रति किलोग्राम
एक माह पूर्व दर: ₹34.53 प्रति किलोग्राम
एक वर्ष पूर्व दर: ₹26.86 प्रति किलोग्राम
पश्चिम एशिया के ऊर्जा बाजार और काला सागर के कृषि-सप्लाई रूट की भावी स्थिति ही यह तय करेगी कि आने वाले दिनों में भारत में ईंधन और खाद्य पदार्थों के दाम किस दिशा में जाएंगे।
















